नई दिल्ली।
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में 27 अक्टूबर की रात हुई तोड़फोड़ और विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं पर प्रशासन ने गहरी चिंता जताई है। विश्वविद्यालय ने इन घटनाओं को गंभीर सुरक्षा चुनौती बताते हुए दुख, निराशा और आक्रोश व्यक्त किया है।
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से 28 अक्टूबर को जारी बयान के अनुसार, परिसर की दीवारों और गेटों पर हमले की सूचना मिलते ही प्रॉक्टोरियल टीम और विश्वविद्यालय के शिक्षक मौके पर पहुंचे। वहां उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों और स्थानीय लोगों के समूहों द्वारा विश्वविद्यालय के गेटों और दीवारों में तोड़फोड़ किए जाने की स्थिति देखी।
बयान में दावा किया गया है कि प्रदर्शनकारियों ने गेट नंबर 4C को गिरा दिया। इसके अलावा पत्थरबाजी की गई और सीसीटीवी कंट्रोल रूम तथा कैमरों को नुकसान पहुंचाते हुए उनके कनेक्शन काट दिए गए। विश्वविद्यालय के अनुसार, नकाबपोश प्रदर्शनकारियों का एक समूह अन्य लोगों को प्रदर्शन में शामिल करने के लिए लड़कों के हॉस्टल तक भी पहुंच गया था।
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे वीडियो में परिसर की संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हुए देखा जा सकता है। ये वीडियो कथित तौर पर प्रदर्शनकारी छात्रों ने ही पोस्ट किए थे। इनके तेजी से प्रसारित होने के बाद विश्वविद्यालय समुदाय में चिंता और नाराजगी बढ़ी है।
प्रशासन के मुताबिक, वीडियो, सीसीटीवी फुटेज और सोशल मीडिया पोस्ट से संकेत मिलता है कि विश्वविद्यालय के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाने के लिए लोहे की मोटी छड़ों, हथौड़ों और अन्य औजारों का इस्तेमाल किया गया।
विश्वविद्यालय ने कहा कि 27 अक्टूबर की रात जिस पैमाने पर और जिस तेजी से तोड़फोड़ हुई, उसने परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जामिया प्रशासन ने अपने बयान में बातचीत की प्रक्रिया का भी उल्लेख किया है। विश्वविद्यालय के अनुसार, प्रदर्शनकारी छात्रों और समिति के सदस्यों के साथ बातचीत की जा रही थी। 27 अक्टूबर की शाम प्रशासन की ओर से संवाद की यह सातवीं कोशिश थी।
प्रशासन का आरोप है कि बातचीत के कुछ ही समय बाद परिसर में तोड़फोड़ शुरू हो गई। बयान में यह भी कहा गया है कि महिला फैकल्टी सदस्यों, वार्डन और प्रोवोस्ट ने जब महिला प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की, तो उन्हें कथित तौर पर धमकियां दी गईं।
विश्वविद्यालय ने इस व्यवहार को निंदनीय बताते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं बातचीत और शांतिपूर्ण विरोध की भावना के विपरीत हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, 27 अक्टूबर की रात की घटनाएं अचानक सामने नहीं आईं। पिछले एक सप्ताह से परिसर के गेटों और चारदीवारी पर चढ़ने, उन्हें नुकसान पहुंचाने और तोड़ने की कोशिशें की जा रही थीं।
हालांकि, प्रशासन का कहना है कि बीती रात हुई तोड़फोड़ का स्तर, उसकी गति और तीव्रता पहले की घटनाओं से कहीं अधिक गंभीर थी।
बयान में यह भी उल्लेख किया गया है कि 24 अक्टूबर 2026 को जारी सूचना के अनुसार, विश्वविद्यालय पहले ही ऑनलाइन मोड में स्थानांतरित हो चुका था।
तोड़फोड़ की घटनाओं के बाद विश्वविद्यालय के शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों ने गहरा दुख और निराशा व्यक्त की है। प्रशासन ने कहा कि इस तरह की घटनाओं से छात्रों, शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं।
विश्वविद्यालय के अनुसार, सुरक्षित शैक्षणिक माहौल बनाए रखने के लिए कक्षाएं, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, सुरक्षा प्रणालियां, बुनियादी ढांचा और परिसर में आने-जाने के रास्ते बेहद महत्वपूर्ण हैं।
इन सुविधाओं को नुकसान पहुंचने से न केवल विश्वविद्यालय को भारी आर्थिक क्षति होती है, बल्कि पूरे शैक्षणिक समुदाय की सुरक्षा और भलाई भी प्रभावित होती है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने मौजूदा घटनाक्रम पर चिंता जताते हुए परिसर की सुरक्षा और शैक्षणिक व्यवस्था को सुरक्षित बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया है।