नई दिल्ली।
देश में प्रारंभिक शिक्षा को मज़बूत करने की दिशा में एक अहम पहल करते हुए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) चालू शैक्षणिक सत्र में कक्षा 3 के विद्यार्थियों की बुनियादी सीखने की क्षमताओं का आकलन करने के लिए फाउंडेशनल लर्निंग स्टडी (एफएलएस) कराएगा। यह अध्ययन दिल्ली के छात्रों पर केंद्रित होगा और इसका उद्देश्य पढ़ने, लिखने और गणना जैसी मूल दक्षताओं को परखना और सुदृढ़ करना है।
दिल्ली राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (दिल्ली राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद – एससीईआरटी) के अनुसार, यह अध्ययन फरवरी–मार्च 2026 के दौरान चयनित (सैंपल) स्कूलों में आयोजित किया जाएगा। इसमें भाग लेने वाले स्कूलों की सूची पहले से साझा कर दी जाएगी, ताकि तैयारी समय पर हो सके।
एफएलएस का मकसद यह समझना है कि आधारभूत चरण के अंत तक छात्र कितनी अच्छी तरह मूल साक्षरता और संख्यात्मक कौशल हासिल कर पा रहे हैं। यह पहल एससीईआरटी और एनसीईआरटी का संयुक्त प्रयास है। तैयारियों के तहत एनसीईआरटी ने हिंदी और अंग्रेज़ी में नमूना आकलन गतिविधियाँ साझा की हैं, ताकि शिक्षक और छात्र आकलन के प्रारूप और प्रक्रिया से परिचित हो सकें।
एससीईआरटी ने स्कूल प्रमुखों और प्रधानाचार्यों से कहा है कि वे कक्षा 3 के शिक्षकों के माध्यम से विद्यार्थियों को इन नमूना गतिविधियों का अभ्यास कराएं। इसके साथ ही स्कूलों को सलाह दी गई है कि वे साझा किए गए नमूनों के अनुरूप विविध अभ्यास प्रश्नों से छात्रों को अवगत कराएं, जिससे उनकी समझ बढ़े और बुनियादी कौशल मजबूत हों।
स्पष्ट किया गया है कि फाउंडेशनल लर्निंग स्टडी कोई परीक्षा या टेस्ट नहीं है। इसमें न तो छात्रों को ग्रेड दिए जाएंगे और न ही किसी प्रकार का प्रमाणपत्र जारी होगा। यह स्कूलों की रेटिंग या प्रमाणन का माध्यम भी नहीं है। यह एक नैदानिक सर्वेक्षण है, जिसका उद्देश्य कक्षा शिक्षण में सुधार और नीतिगत निर्णयों को सशक्त बनाना है।
एनसीईआरटी के अनुसार, इस अध्ययन से प्राप्त निष्कर्षों का उपयोग कक्षा शिक्षण पद्धतियों को बेहतर बनाने, शिक्षकों के सहयोग को मज़बूत करने और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत प्रारंभिक शिक्षा को सुदृढ़ करने में किया जाएगा। अध्ययन की सफल और प्रभावी क्रियान्विति के लिए स्कूलों का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण बताया गया है।






.png)