जामिया में असम के चाय बागान समुदायों के कौशल विकास पर राष्ट्रीय परामर्श

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 30-09-2026
National Consultation on Skill Development of Assam's Tea Garden Communities at Jamia
National Consultation on Skill Development of Assam's Tea Garden Communities at Jamia

 

नई दिल्ली

जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली में असम के चाय बागान समुदायों के कौशल विकास, आजीविका और सामाजिक-आर्थिक सशक्तीकरण पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श बैठक का उद्घाटन 28 सितंबर को मीर अनीस हॉल में किया गया। भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) की ओर से वित्तपोषित शोध परियोजना के तहत आयोजित इस बैठक में डिजिटल और गैर-डिजिटल कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से असम की चाय जनजातियों को सशक्त बनाने पर चर्चा की गई।

इस शोध परियोजना का मुख्य फोकस असम के डिब्रूगढ़ और लखीमपुर जिलों के चाय बागान समुदायों पर है। बैठक में चाय बागानों की मैपिंग, शोध के लिए जमीनी स्तर पर पहुंच बनाने, मौजूदा कौशल विकास कार्यक्रमों का आकलन करने और समुदायों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण की कार्यप्रणाली विकसित करने पर जोर दिया गया।

कौशल विकास और आजीविका पर विशेषज्ञों ने रखे विचार

उद्घाटन सत्र की शुरुआत मोहम्मद इंजमामुल हक द्वारा कुरान पाठ से हुई। इसके बाद प्रो. कौशल किशोर ने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने पारंपरिक असमिया जनजातीय सम्मान के प्रतीक गमोचा भेंट कर विशिष्ट अतिथियों का अभिनंदन किया।

कार्यक्रम में केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित सेंटर फॉर डेवलपमेंट स्टडीज में मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स चेयर के प्रो. विनोज अब्राहम मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कौशल विकास, आजीविका और समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए।

असम सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. एम. अरिज ने विशेष अतिथि के रूप में हिस्सा लिया। उन्होंने चाय बागान समुदायों की आजीविका संबंधी जरूरतों को समझने और शोध को उनकी वास्तविक समस्याओं से जोड़ने के महत्व पर जोर दिया।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कुलपति ने अध्यक्षीय संबोधन में इस शोध पहल की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। विश्वविद्यालय के शिक्षा संकाय की डीन प्रो. अनीता रस्तोगी ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने शैक्षणिक दृष्टिकोण, जमीनी अनुभवों और शोध आधारित निष्कर्षों को एक साथ जोड़ने की आवश्यकता बताई।

शोध पद्धति और प्रशिक्षण के अवसरों पर चर्चा

परियोजना समन्वयक डॉ. काजी फिरदौसी इस्लाम ने शोध परियोजना के उद्देश्यों और परामर्श बैठक की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि शोध पद्धति को बेहतर बनाने, चाय बागान समुदायों तक प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने और कौशल विकास के उपयुक्त अवसरों की पहचान करने के लिए विशेषज्ञों के बीच विचार-विमर्श आवश्यक है।

परियोजना टीम में डॉ. काजी फिरदौसी इस्लाम समन्वयक के रूप में शामिल हैं। इसके अलावा प्रो. कौशल किशोर, प्रो. अहरार हुसैन, प्रो. निवेदिता गोस्वामी, डॉ. समीर बाबू और डॉ. जेबा तबस्सुम परियोजना के निदेशक के रूप में कार्य कर रहे हैं।

शोध के लिए असम के डिब्रूगढ़ और लखीमपुर जिलों के चाय बागानों को केंद्र में रखा गया है। बैठक में इन क्षेत्रों में अध्ययन स्थलों के चयन, स्थानीय समुदायों तक पहुंच बनाने की रणनीति और प्रभावी प्रशिक्षण कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करने पर विचार किया गया।

देशभर के शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने लिया हिस्सा

इस राष्ट्रीय परामर्श बैठक में देश के विभिन्न हिस्सों से शिक्षाविदों, पेशेवरों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, क्षेत्रीय विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने भाग लिया।

प्रतिभागियों में डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय, गुवाहाटी विश्वविद्यालय, ओकेडी इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल चेंज एंड डेवलपमेंट (OKDISCD), सिक्किम विश्वविद्यालय और जामिया मिल्लिया इस्लामिया के विशेषज्ञ शामिल रहे। इसके अलावा चाय बागान क्षेत्रों में काम करने वाले गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया।

कार्यक्रम के अंत में प्रो. अहरार हुसैन ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने अतिथियों, शोध परियोजना की टीम और सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इसके बाद राष्ट्रगान के साथ उद्घाटन सत्र का समापन हुआ।

यह तीन दिवसीय बैठक असम के चाय बागान समुदायों की जरूरतों को समझने, कौशल विकास के प्रभावी अवसर तलाशने और शोध कार्यप्रणाली को मजबूत बनाने की दिशा में अकादमिक संवाद और सहयोग का मंच प्रदान करेगी।