एएमयू के अजमल खान तिब्बिया कॉलेज में 11वां विश्व आयुर्वेद दिवस मनाया गया

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 25-09-2026
Walkout in protest against Netanyahu's speech at the UN.
Walkout in protest against Netanyahu's speech at the UN.

 

अलीगढ़

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के अजमल खान तिब्बिया कॉलेज में 11वां विश्व आयुर्वेद दिवस अकादमिक और शैक्षिक गतिविधियों के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में आयुर्वेद की निरंतर प्रासंगिकता के साथ-साथ आयुर्वेद, यूनानी और पारंपरिक एवं समन्वित चिकित्सा पद्धतियों के बीच सार्थक संवाद की संभावनाओं को रेखांकित किया गया।

यह कार्यक्रम भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय और आयुष मंत्रालय की ओर से आयुर्वेद दिवस के आयोजन के सिलसिले में की गई पहल के अनुरूप आयोजित किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एएमयू के पूर्व कुलपति प्रो. मोहम्मद गुलरेज ने भारत की विविध पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने आयुर्वेद, यूनानी और अन्य चिकित्सा पद्धतियों के बीच अकादमिक सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने छात्रों और शिक्षकों से विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों की व्यापक समझ विकसित करने तथा आपसी सीख और सहयोग के क्षेत्रों की तलाश करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में अलीगढ़ के जीवन ज्योति आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के कायचिकित्सा विभाग के अध्यक्ष प्रो. सौरभ नायक ने “आयुर्वेद: शाश्वत ज्ञान, विशिष्ट सिद्धांत और स्वस्थ भविष्य की राह” विषय पर व्याख्यान दिया।

उन्होंने आयुर्वेद के मूलभूत सिद्धांतों और समकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के संदर्भ में उनकी निरंतर प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। साथ ही, पारंपरिक और समन्वित चिकित्सा की विभिन्न पद्धतियों के बीच अकादमिक संवाद की संभावनाओं पर भी जोर दिया।

यूनानी चिकित्सा संकाय की डीन प्रो. सैयदा आमिना नाज़ ने अतिथियों और आमंत्रित वक्ता के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने प्रो. नायक के जानकारीपूर्ण व्याख्यान की भी सराहना की।

अजमल खान तिब्बिया कॉलेज के प्राचार्य प्रो. बी.डी. खान ने यूनानी चिकित्सा संस्थान में आयोजित इस कार्यक्रम में दिखाई गई अकादमिक खुलेपन की भावना की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह का संवाद पारस्परिक और समावेशी होना चाहिए।

कार्यक्रम में निबंध और पोस्टर प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं। इनमें छात्रों ने पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों, स्वास्थ्य और कल्याण से जुड़े विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। बाद में प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए।

कार्यक्रम के समन्वयक प्रो. फारूक अहमद डार ने अतिथियों का स्वागत किया और कार्यक्रम के अकादमिक महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. अबीहा अहमद खान ने कार्यक्रम का संचालन किया, जबकि डॉ. अतिया समद ने धन्यवाद ज्ञापित किया।