नई दिल्ली
HILSR, School of Law की ओर से “Law in Action Series” के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और स्वायत्त हथियार प्रणालियों यानी Autonomous Weapon Systems (AWS) पर एक महत्वपूर्ण और विचारोत्तेजक सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र में तकनीक, अंतरराष्ट्रीय कानून, मानवाधिकार और आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप के बीच उभरती चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम में चीन की Zhejiang Gongshang University के प्रोफेसर सानोज राजन ने मुख्य वक्ता के रूप में हिस्सा लिया। उन्होंने AI आधारित स्वायत्त हथियार प्रणालियों से जुड़े कानूनी, नैतिक और मानवीय पहलुओं पर अपने विचार साझा किए। सत्र का उद्देश्य विद्यार्थियों और कानून के क्षेत्र से जुड़े लोगों को यह समझने में मदद करना था कि तेजी से विकसित हो रही AI तकनीक भविष्य के युद्ध और अंतरराष्ट्रीय कानून को किस तरह प्रभावित कर सकती है।
AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ स्वायत्त हथियार प्रणालियां वैश्विक स्तर पर चर्चा का महत्वपूर्ण विषय बन चुकी हैं। ऐसी प्रणालियां कुछ परिस्थितियों में मानव के प्रत्यक्ष हस्तक्षेप के बिना लक्ष्यों की पहचान करने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने में सक्षम हो सकती हैं। इससे युद्ध के दौरान मानव नियंत्रण, जवाबदेही, नागरिकों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के पालन से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल सामने आते हैं।
सत्र के दौरान इस बात पर भी चर्चा हुई कि यदि किसी स्वायत्त हथियार प्रणाली के इस्तेमाल से नागरिकों को नुकसान पहुंचता है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। क्या इसके लिए हथियार विकसित करने वाले, उसे संचालित करने वाले सैन्य अधिकारी या संबंधित राज्य को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है? ऐसे सवाल आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकार कानून के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं।
कार्यक्रम में HILSR की डीन प्रो. (डॉ.) सलीना के. बशीर की भी विशेष उपस्थिति रही। उनकी मौजूदगी ने कार्यक्रम को अकादमिक और कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाया। सत्र का समन्वय HILSR की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अमृता सतीशन ने किया।
विशेषज्ञ सत्र के दौरान विद्यार्थियों को AI और युद्ध के बीच बदलते संबंध को केवल तकनीकी नजरिए से नहीं, बल्कि कानूनी और मानवीय दृष्टिकोण से समझने का अवसर मिला। चर्चा में यह सवाल भी अहम रहा कि तकनीकी विकास और मानवीय मूल्यों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
आयोजकों के अनुसार, ऐसे कार्यक्रम कानून के विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। AI जैसी उभरती तकनीकों का प्रभाव अब केवल सूचना प्रौद्योगिकी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह न्याय व्यवस्था, मानवाधिकार, राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संबंधों जैसे क्षेत्रों को भी प्रभावित कर रहा है।
“Law in Action Series” के तहत आयोजित यह सत्र विद्यार्थियों के लिए विशेषज्ञों के विचार सुनने और उभरते कानूनी मुद्दों पर संवाद करने का अवसर बना। कार्यक्रम ने यह रेखांकित किया कि भविष्य के कानूनी पेशेवरों के लिए तकनीकी बदलावों की समझ उतनी ही महत्वपूर्ण होगी, जितनी पारंपरिक कानून और न्यायिक सिद्धांतों की जानकारी।
यह सत्र नई पीढ़ी के कानून विशेषज्ञों को AI और स्वायत्त हथियार प्रणालियों जैसे जटिल विषयों पर गंभीर, जिम्मेदार और मानवीय दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अकादमिक पहल के रूप में सामने आया।