एएमयू में मोटापे पर राष्ट्रीय सीएमई आयोजित

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 12-05-2026
National CME on Obesity organised at AMU
National CME on Obesity organised at AMU

 

अलीगढ़

Aligarh Muslim University के Jawaharlal Nehru Medical College में मोटापे जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या पर एक राष्ट्रीय स्तर का कंटिन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन (CME) कार्यक्रम आयोजित किया गया। “डिकोडिंग ओबेसिटी: फ्रॉम पैथोफिजियोलॉजी टू मॉडर्न थेरेप्यूटिक्स” शीर्षक से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य मोटापे के बढ़ते खतरे, उसके कारणों और आधुनिक उपचार पद्धतियों पर चिकित्सकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच गहन चर्चा करना था।

इस कार्यक्रम का आयोजन मेडिसिन विभाग और राजीव गांधी सेंटर फॉर डायबिटीज एंड एंडोक्रिनोलॉजी द्वारा फैकल्टी ऑफ मेडिसिन ऑडिटोरियम में किया गया। देशभर से आए डॉक्टरों, शोधकर्ताओं, डाइटिशियनों और चिकित्सा छात्रों ने इसमें भाग लिया। कार्यक्रम में मोटापे को केवल शरीर का वजन बढ़ने की समस्या नहीं, बल्कि एक जटिल मेटाबॉलिक बीमारी के रूप में समझने पर जोर दिया गया।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए फैकल्टी ऑफ मेडिसिन के डीन प्रोफेसर Mohammad Khalid ने कहा कि मोटापा आज वैश्विक स्वास्थ्य संकट का रूप ले चुका है। उन्होंने कहा कि यह बीमारी केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक समस्याओं को भी जन्म देती है। उन्होंने मोटापे के इलाज के लिए व्यापक और व्यक्तिगत उपचार रणनीतियों की आवश्यकता पर बल दिया।

वहीं जे.एन. मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर Naiyer Asif ने कहा कि मोटापा अब हृदय रोगों और एंडोक्राइन संबंधी बीमारियों का बड़ा कारण बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि बदलती जीवनशैली और खानपान की आदतों के कारण यह समस्या तेजी से बढ़ रही है, इसलिए डॉक्टरों को आधुनिक उपचार पद्धतियों की जानकारी होना बेहद जरूरी है।

वैज्ञानिक सत्रों में विशेषज्ञों ने मोटापे से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। प्रोफेसर Jamal Ahmad ने मोटापे की पैथोफिजियोलॉजी और टाइप-2 डायबिटीज जैसे मेटाबॉलिक रोगों से उसके संबंध को समझाया। उन्होंने बताया कि मोटापा कई गंभीर बीमारियों की जड़ बनता जा रहा है और समय रहते इसकी रोकथाम जरूरी है।

डॉ. Khushboo Agarwal ने बॉडी मास इंडेक्स (BMI) से आगे बढ़कर मोटापे के आधुनिक आकलन तरीकों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि केवल BMI के आधार पर किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य का सही मूल्यांकन नहीं किया जा सकता। वहीं डॉ. Syed Mohammad Razi ने वैज्ञानिक आधार पर पोषण और जीवनशैली प्रबंधन के महत्व को रेखांकित किया।

कार्यक्रम में डॉ. Mohammad Asim Siddiqui ने मोटापे के इलाज में नई दवाओं और GLP-1 आधारित थेरेपी की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आधुनिक दवाएं न केवल वजन नियंत्रित करने में मदद कर रही हैं, बल्कि शरीर की मेटाबॉलिक रिकवरी में भी प्रभावी साबित हो रही हैं।

इस राष्ट्रीय CME का आयोजन प्रोफेसर K S Zafar और प्रोफेसर Hamid Ashraf के नेतृत्व में किया गया। कार्यक्रम में 150 से अधिक पोस्टग्रेजुएट छात्र, चिकित्सक और डाइटिशियन शामिल हुए। विशेषज्ञों ने उम्मीद जताई कि इस तरह के कार्यक्रम मोटापे जैसी गंभीर समस्या से निपटने में चिकित्सा जगत को नई दिशा देंगे।