नई दिल्ली:
राजधानी स्थित Jamia Millia Islamia में ‘21वीं सदी में पर्यावरणीय स्थिरता’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में पर्यावरण संरक्षण और हरित अर्थव्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण विचार सामने आए। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री Jitendra Singh ने मजबूत ग्रीन इकॉनमी के निर्माण पर जोर देते हुए कहा कि यही भविष्य की स्थायी प्रगति की कुंजी है।
सम्मेलन का आयोजन जामिया के पर्यावरण विज्ञान विभाग द्वारा किया गया, जिसमें देशभर के 12 राज्यों से आए शिक्षाविद, शोधकर्ता, नीति निर्माता और उद्योग विशेषज्ञ शामिल हुए। इसका उद्देश्य पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों पर गंभीर चर्चा और उनके स्थायी समाधान तलाशना था।
अपने संबोधन में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत के पास ग्रीन ट्रांजीशन में वैश्विक नेतृत्व करने की क्षमता है। इसके लिए इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा, जैव प्रौद्योगिकी, जैव ईंधन और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में तेजी से काम करना होगा। उन्होंने यह भी बताया कि भारत के पास थोरियम का बड़ा भंडार है, जो भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने ‘अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन’ (ANRF) के तहत 1 लाख करोड़ रुपये के अनुसंधान एवं नवाचार कोष का जिक्र करते हुए कहा कि यह युवाओं के लिए रोजगार और शोध के नए अवसर पैदा करेगा।
वहीं, केंद्रीय MSME मंत्री Jitan Ram Manjhi ने अपने वीडियो संदेश में वनों की कटाई को पर्यावरण के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया। उन्होंने कहा कि अनियंत्रित शहरीकरण और पेड़ों की कटाई के कारण कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर बढ़ रहा है, जिससे ओजोन परत को नुकसान पहुंच रहा है और जलवायु परिवर्तन तेज हो रहा है।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो इसका असर खेती, स्वास्थ्य और पूरी मानव सभ्यता पर पड़ेगा। उन्होंने सभी से पर्यावरण संरक्षण के लिए एकजुट होकर काम करने की अपील की।
इस अवसर पर D. P. Singh ने नई शिक्षा नीति 2020 के तहत ‘ग्रीन कैंपस’ विकसित करने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को रेनवाटर हार्वेस्टिंग, अपशिष्ट प्रबंधन, सौर ऊर्जा और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देना चाहिए।
जामिया के कुलपति Mazhar Asif ने छात्रों से अपील की कि वे कचरे को कम करें, उसे पुनः उपयोग में लाएं और रीसायक्लिंग को अपनाएं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधन सीमित हैं और उनका समझदारी से उपयोग करना ही भविष्य को सुरक्षित बनाएगा।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि भारत ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य के तहत 2070 तक ‘नेट ज़ीरो’ उत्सर्जन हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए सरकार हरित बुनियादी ढांचे और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा दे रही है।
सम्मेलन में 25 से अधिक संस्थानों के विशेषज्ञों ने भाग लिया और 200 से ज्यादा शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। यह मंच पर्यावरणीय स्थिरता के क्षेत्र में नए विचारों और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजनों से न केवल जागरूकता बढ़ती है, बल्कि नीति निर्माण में भी ठोस दिशा मिलती है, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और संतुलित पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सकता है।