जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती गर्मी बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य पर डाल रही असर: अध्ययन

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 05-06-2026
Increasing heat due to climate change is affecting children's education and health: Study
Increasing heat due to climate change is affecting children's education and health: Study

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
 दक्षिणी अफ्रीका में जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान लगातार बढ़ रहा है। अब तक सूखा, बाढ़ और खाद्य असुरक्षा जैसे प्रभावों पर अधिक ध्यान दिया गया है, लेकिन एक और गंभीर संकट चुपचाप स्कूलों के भीतर पैर पसार रहा है। शोध से पता चला है कि कई स्कूल बच्चों के विकास, पढ़ाई और खेलकूद के लिए खतरनाक रूप से गर्म स्थान बनते जा रहे हैं।
 
विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक गर्म कक्षाएं बच्चों की एकाग्रता, स्मरण शक्ति, व्यवहार और शैक्षणिक प्रदर्शन को प्रभावित करती हैं। रोशनी और हवा की समुचित व्यवस्था का अभाव, भीड़भाड़ वाली कक्षाओं और पीने के पानी की सीमित उपलब्धता वाले स्कूलों में बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है।
 
दक्षिण अफ्रीका मेडिकल रिसर्च काउंसिल के पर्यावरण स्वास्थ्य वैज्ञानिकों द्वारा किए गए शोध में पाया गया कि बढ़ता तापमान बच्चों के दैनिक जीवन और कल्याण को प्रभावित कर रहा है। जोहानिसबर्ग विश्वविद्यालय के साथ मिलकर गौतेंग प्रांत में किए गए अध्ययन में तापमान और आर्द्रता से जुड़े आधे से अधिक मापदंड ‘सावधानी’ या ‘अत्यधिक सावधानी’ की श्रेणी में पाए गए।
 
जोहानिसबर्ग में कक्षाओं के तापमान पर किए गए एक अन्य अध्ययन में लगभग सभी बच्चों ने अपनी एकाग्रता का स्तर कम होने की बात कही। एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि जब तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो जाता है तो छात्रों की अनुपस्थिति बढ़ जाती है।
 
शोधकर्ताओं का कहना है कि अधिकतर स्कूल भवनों और खेल मैदानों को अत्यधिक गर्मी से बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर नहीं बनाया गया है। सरकारी सहायता से बने कम लागत वाले मकानों और अनौपचारिक बस्तियों में रहने वाले परिवार अत्यधिक तापमान के जोखिम का अधिक सामना कर रहे हैं।
 
हालिया अध्ययन में ग्रामीण और शहरी स्कूलों के बीच भी स्पष्ट अंतर सामने आया है। अध्ययन के अनुसार, शहरी कक्षाएं 25 से 28 डिग्री सेल्सियस के अपेक्षाकृत आरामदायक तापमान को बनाए रखने में ग्रामीण कक्षाओं की तुलना में अधिक सक्षम हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अंतर शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी असमानताओं को और बढ़ा सकते हैं।
 
शोधकर्ताओं ने कहा कि जलवायु परिवर्तन को अभी भी कई लोग भविष्य की समस्या मानते हैं, लेकिन अत्यधिक गर्म कक्षाओं में बैठने वाले बच्चों के लिए यह पहले से ही उनकी सीखने की क्षमता, विकास और स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि दक्षिणी अफ्रीका की शिक्षा प्रणालियों को अधिक गर्म भविष्य के लिए तैयार होना होगा।
 
अध्ययन के अनुसार, मानव मस्तिष्क सीमित तापमान सीमा में बेहतर ढंग से काम करता है। कक्षाओं के अधिक गर्म होने पर बच्चों को ध्यान केंद्रित करने, चीजों को समझने और उसे याद रखने में कठिनाई होती है। अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों में भी गर्म कक्षाओं को खराब परीक्षा परिणाम, कम ध्यान अवधि और घटती उत्पादकता से जोड़ा गया है।
 
शोध में कहा गया है कि छोटे बच्चे विशेष रूप से अधिक संवेदनशील होते हैं क्योंकि उनका शरीर वयस्कों की तुलना में गर्मी को कम प्रभावी ढंग से नियंत्रित कर पाता है और उनमें निर्जलीकरण का खतरा अधिक रहता है।