नई दिल्ली,
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती किसी संयोग का परिणाम नहीं है, बल्कि यह मजबूत नीतिगत ढांचे, विश्वसनीय संस्थानों और वर्षों से किए गए सुधारों का नतीजा है। उन्होंने यह बात प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में अपने संबोधन के दौरान कही।
मल्होत्रा ने कहा, “भारतीय अर्थव्यवस्था की लचीलापन यूं ही नहीं आया है। यह मजबूत नीतिगत ढांचे, भरोसेमंद संस्थानों और सतत सुधारों की देन है। इसकी नींव स्थिरता और समावेशन पर टिकी है।” उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में भारत की औसत वार्षिक विकास दर 6.1 प्रतिशत रही है, जो वैश्विक औसत 3.2 प्रतिशत से काफी अधिक है। इतना ही नहीं, भारत ने इस मामले में चीन और इंडोनेशिया जैसे क्षेत्रीय देशों को भी पीछे छोड़ दिया है।
आरबीआई गवर्नर ने इस स्थिरता का श्रेय केंद्रीय बैंक की सक्रिय भूमिका को दिया। उन्होंने कहा कि आरबीआई एक पूर्ण सेवा संस्थान के रूप में कार्य करता है, जो मुद्रा प्रबंधन, विदेशी मुद्रा, बैंकिंग नियमन और भुगतान प्रणालियों जैसे कई क्षेत्रों को संभालता है। उन्होंने 2016 में लागू किए गए फ्लेक्सिबल इन्फ्लेशन टार्गेटिंग (FIT) फ्रेमवर्क को इस स्थिरता का प्रमुख आधार बताया।
FIT व्यवस्था के तहत 2016 से 2025 के बीच औसत महंगाई दर घटकर 4.7 प्रतिशत रह गई, जबकि इससे पहले यह 7.4 प्रतिशत थी। मल्होत्रा ने कहा कि वर्तमान में आरबीआई “वेट एंड वॉच” यानी सतर्क निगरानी की नीति पर काम कर रहा है, खासकर पश्चिम एशिया में चल रहे संकट को देखते हुए। उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां से देश को लगभग आधा कच्चा तेल और बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा (रेमिटेंस) प्राप्त होती है।
उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय बैंकिंग में अनिश्चितता ही एकमात्र निश्चितता है, जिससे मौद्रिक नीति बनाना और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इसलिए आरबीआई डेटा आधारित निर्णय लेने और जोखिमों का लगातार मूल्यांकन करने की रणनीति अपनाता है।
मल्होत्रा ने वित्तीय और मौद्रिक नीति के बीच बेहतर तालमेल की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र को मजबूत करने और बुनियादी ढांचे के विकास जैसे कदमों ने आरबीआई की नीतियों को समर्थन दिया है। वित्तीय अनुशासन का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा 2020-21 में 9.2 प्रतिशत से घटकर 2025-26 में 4.4 प्रतिशत हो गया है।
उन्होंने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) प्रणाली को एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि इससे 2024 की शुरुआत तक करीब 50 अरब डॉलर की बचत हुई है।
वित्तीय स्थिरता पर बोलते हुए मल्होत्रा ने कहा कि आरबीआई की सतर्क नीतियों ने भारत को 1997 के एशियाई वित्तीय संकट और 2008 के वैश्विक आर्थिक संकट के दौरान सुरक्षित रखा। उन्होंने कहा कि अल्पकालिक लाभ की बजाय दीर्घकालिक स्थिरता को प्राथमिकता देना ही भारत की सफलता का राज है।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने भारत की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की सराहना की। उन्होंने बताया कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने मार्च महीने में 22 अरब से अधिक लेनदेन दर्ज किए। साथ ही, आरबीआई अब यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस (ULI) पर काम कर रहा है, जिससे छोटे किसानों और व्यापारियों को तुरंत ऋण उपलब्ध कराया जा सकेगा।