नजमा फारूकी: खाकी में छिपी संवेदना और भरोसे की मिसाल

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 21-04-2026
Najma Farooqui: An Exemplar of Compassion and Trust Beneath the Khaki
Najma Farooqui: An Exemplar of Compassion and Trust Beneath the Khaki

 

सानिया अंजुम

कुछ अधिकारी अपनी धमक से पहचाने जाते हैं, लेकिन कुछ अपनी नेक नीयती से लोगों के दिलों में जगह बनाते हैं। पुलिस अधिकारी नजमा फारूकी दूसरी श्रेणी में आती हैं। उनके लिए वर्दी का मतलब सिर्फ ताकत नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और इंसानियत है। उनका मानना है कि पुलिसिंग केवल कानून लागू करना नहीं, बल्कि जनता का भरोसा जीतना है।

नजमा के इस सफर की नींव उनके घर में ही पड़ गई थी। वे अपने पिता को एक दूरदर्शी इंसान और अपनी प्रेरणा मानती हैं। उनके किस्सों और उसूलों ने ही नजमा के नजरिए को गढ़ा। वहीं उनकी मां उनकी भावनात्मक ताकत बनी रहीं। नजमा कहती हैं कि उनकी मां की सादगी, आंतरिक शक्ति और उन पर अटूट भरोसे ने ही उन्हें हमेशा जमीन से जुड़े रहने की सीख दी।

बचपन से ही नजमा काफी जिज्ञासु स्वभाव की थीं। उन्हें नामों के पीछे की कहानी आकर्षित करती थी। अरबी भाषा में 'नजमा' का अर्थ होता है तारा। उनके पिता अक्सर कहते थे कि दूसरों को सही रास्ता दिखाने के लिए खुद को अपने काम में चमकना होगा। यही बात उनके मन में घर कर गई। उन्होंने खुद से सवाल किया कि कोई आपकी बात क्यों मानेगा, जब तक कि आप खुद को उस काबिल न बना लें। यही जिद उनके पेशेवर जीवन की प्रेरणा बनी।

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नजमा फारूकी के लिए पुलिसिंग सत्ता का खेल नहीं, बल्कि विश्वास की कड़ी है। वे मानती हैं कि पुलिस अधिकारी की शक्ति असल में जनता का वह भरोसा है जो उन पर किया जाता है। वे खुद को प्रशासन और जनता के बीच के एक सेतु के रूप में देखती हैं। उनका मकसद कानून के जरिए दबे-कुचले लोगों को सशक्त बनाना और उन्हें सुरक्षा का अहसास कराना है।

वर्दी हो या आम जिंदगी, नजमा के नैतिक मूल्य कभी नहीं बदलते। सहानुभूति, ईमानदारी और सेवा के प्रति समर्पण उनके लिए सबसे ऊपर है। वे कहती हैं कि ये मूल्य ही एक पुलिस अधिकारी के रूप में उन्हें मजबूती देते हैं और सही फैसले लेने में मदद करते हैं।

पुलिस जैसे महकमे में जहां अनुशासन और पदानुक्रम (Hierarchy) बहुत मायने रखता है, वहां नजमा टीम वर्क और बातचीत को प्राथमिकता देती हैं। उनका मानना है कि अनुशासन पुलिस की रीढ़ है, लेकिन संवेदनशीलता उसकी आत्मा।

वे किसी भी मिशन से पहले और बाद में अपनी टीम के साथ विस्तार से चर्चा करती हैं। उनका मानना है कि जब टीम समझ जाती है कि नियम काम को आसान बनाने के लिए हैं, तो वे खुशी-खुशी उनका पालन करते हैं। वे दंडात्मक कार्रवाई के बजाय सुधारवादी नजरिया अपनाने में यकीन रखती हैं।

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उनके करियर का एक बड़ा बदलाव टी.एस. हल्ली में प्रोबेशनरी पोस्टिंग के दौरान आया। उससे पहले उन्होंने कभी पुलिस स्टेशन के अंदर कदम नहीं रखा था। उनके मन में भी पुलिस की वही छवि थी जो फिल्मों में दिखाई जाती है। लेकिन जब उन्होंने असल लोगों और उनकी उलझनों का सामना किया, तो उनकी सोच बदल गई। उन्होंने देखा कि लोग पुलिस थानों के चक्कर और देरी की वजह से वहां आने से डरते हैं।

एक बार एक लापता लड़की के माता-पिता पुलिस में शिकायत दर्ज कराने से कतरा रहे थे। नजमा और उनकी टीम ने लगातार 52घंटों तक मेहनत की। उन्होंने न सिर्फ परिवार का भरोसा जीता बल्कि लड़की को ढूंढकर सुरक्षित घर वापस पहुंचाया। उस घटना ने उन्हें टीम वर्क, धैर्य और जवाबदेही का सबसे बड़ा सबक सिखाया।

नजमा के लिए जनता की सेवा एक व्यक्तिगत जुड़ाव है। वे मानती हैं कि समाज को केवल अस्थायी हस्तक्षेप की नहीं, बल्कि निरंतर साथ और मार्गदर्शन की जरूरत है। वे समस्याओं की जड़ तक जाकर उन्हें सुलझाने में विश्वास रखती हैं। उनका विजन है कि समाज के प्रभावशाली लोग और अधिकारी मिलकर एक बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

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काम के दबाव से दूर नजमा अपनी शांति परिवार के बीच तलाशती हैं। जब वे ड्यूटी पर नहीं होतीं, तो उनका दिल अपने अपनों के पास होता है। उन्हें छोटे-छोटे प्रेरक लेख लिखना पसंद है। खुद को फिट रखने के लिए वे वर्कआउट और योग का सहारा लेती हैं। इसके अलावा वे छात्रों के बीच जाकर उन्हें साइबर सुरक्षा, ड्रग्स और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करती हैं। एक अधिकारी के साथ-साथ वे एक गुरु की भूमिका भी बखूबी निभाती हैं।

नजमा फारूकी की कहानी यह साबित करती है कि असरदार होने के लिए चिल्लाने की जरूरत नहीं होती। जब अधिकार के साथ ईमानदारी और संवेदना जुड़ जाती है, तो वह समाज को बदलने की ताकत रखती है। उनके हाथों में पुलिसिंग महज एक नौकरी नहीं, बल्कि उद्देश्य के साथ की गई सेवा है।