The RBI Governor outlined the role of central banks in financial stability.
नई दिल्ली।
केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 12-13 अगस्त को जयपुर में आयोजित BRICS वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठक की सह-अध्यक्षता की। बैठक में वैश्विक वित्तीय व्यवस्था को मजबूत बनाने और आर्थिक स्थिरता से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।
RBI के अनुसार, बैठक के दौरान गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मूल्य स्थिरता और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में केंद्रीय बैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मजबूत, प्रभावी और समावेशी वित्तीय व्यवस्था के निर्माण के लिए केंद्रीय बैंकों के बीच सहयोग बेहद जरूरी है।
वित्तीय प्रणाली को मजबूत बनाने पर जोर
RBI ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि संजय मल्होत्रा ने सम्मेलन के दौरान वित्तीय क्षेत्र से जुड़े विभिन्न संस्थागत प्रयासों की सराहना की।
इनमें सूचना सुरक्षा, फिनटेक, सीमा-पार भुगतान, सतत वित्त, क्षमता निर्माण और आकस्मिक रिजर्व व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल रहे।
RBI के मुताबिक, इन क्षेत्रों में केंद्रीय बैंक के विभिन्न कार्यसमूहों की ओर से किए जा रहे प्रयास वित्तीय प्रणाली को अधिक मजबूत और लचीला बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
गवर्नर ने इस बात पर भी जोर दिया कि केंद्रीय बैंकों के बीच बेहतर तालमेल और अनुभवों का आदान-प्रदान वैश्विक वित्तीय प्रणाली को भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए अधिक सक्षम बना सकता है।
इंडोनेशिया के उप वित्त मंत्री से मिलीं सीतारमण
BRICS बैठक से इतर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 12 अगस्त को जयपुर में इंडोनेशिया के उप वित्त मंत्री जुडा अगुंग से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने वित्तीय क्षेत्र के विकास और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवाओं में सहयोग बढ़ाने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, बैठक में भारत और इंडोनेशिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों में हालिया प्रगति पर भी चर्चा हुई। मंत्रालय ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछले महीने इंडोनेशिया की राजकीय यात्रा के बाद दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई गति मिली है।
दोनों पक्षों ने वित्तीय सेवाओं में सहयोग बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रशासनिक और नीतिगत व्यवस्थाओं पर विचार किया।
वित्तीय केंद्रों से लेकर स्थानीय मुद्रा कारोबार तक चर्चा
बैठक में वित्तीय क्षेत्र के विकास, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवाओं में सहयोग और वित्तीय केंद्रों की स्थापना एवं संचालन से जुड़े अनुभव साझा करने जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
इसके अलावा भारत-इंडोनेशिया आर्थिक एवं वित्तीय संवाद, व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने और स्थानीय मुद्राओं में लेन-देन बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों ने ज्ञान और अनुभव साझा करने तथा वित्तीय क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने की जरूरत पर सहमति जताई।
ग्लोबल साउथ में सहयोग पर जोर
भारत और इंडोनेशिया ने खुद को ग्लोबल साउथ के समान विचारधारा वाले सदस्य बताते हुए बहुपक्षीय संस्थानों में मिलकर काम जारी रखने पर सहमति जताई।
इंडोनेशिया के उप वित्त मंत्री जुडा अगुंग ने भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि और आर्थिक लचीलेपन की सराहना की।
बैठक में वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच आर्थिक विकास को बनाए रखने की चुनौती पर भी चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने माना कि संरचनात्मक सुधार, बुनियादी ढांचे में लगातार निवेश और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) व्यापक आर्थिक स्थिरता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
BRICS बैठक में वित्तीय स्थिरता, तकनीकी सहयोग और आर्थिक समन्वय पर हुई चर्चा को सदस्य देशों के बीच वित्तीय सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।