The proportion of the working population in the country will decrease after 2030, it is necessary to increase the pace of employment generation: Report
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
देश में आने वाले समय में रोजगार सृजन की गति बढ़ाने की जरूरत और बढ़ जाएगी क्योंकि जनसांख्यिकीय लाभ सीमित समय के लिए ही उपलब्ध रहेगा और 2030 के बाद कामकाजी आयु वर्ग की आबादी का अनुपात घटने लगेगा। एक रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया है।
अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय की रिपोर्ट ‘भारत में कामकाज की स्थिति-2026’ में देश के युवाओं की शिक्षा, रोजगार और श्रम बाजार से जुड़े कई अहम रुझानों को रेखांकित किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, शिक्षित एवं आकांक्षी युवाओं की बढ़ती संख्या को रोजगार बाजार में प्रभावी ढंग से शामिल करना भारत के जनसांख्यिकीय लाभ को आर्थिक वृद्धि में तब्दील करने के लिए निर्णायक होगा।
इसमें कहा गया है कि 2030 के बाद कामकाजी आबादी का अनुपात घटने लगेगा जिससे रोजगार सृजन की गति बढ़ाने की जरूरत और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी।
रिपोर्ट कहती है, पिछले चार दशक में युवाओं की शिक्षा के स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और उच्च शिक्षा में नामांकन दर 28 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जिसमें महिलाओं की भागीदारी खासतौर पर बढ़ी है। हालांकि, पुरुषों के नामांकन में गिरावट दर्ज की गई है। यह 2017 के 38 प्रतिशत से घटकर 2024 के अंत तक 34 प्रतिशत रह गई है। इसके पीछे मुख्य वजह यह है कि पुरुष अपने परिवार की जरूरत को पूरा करने के लिए कमाने के अवसर तलाशने लगते हैं।