देश में ‘गिग वर्कर’ की संख्या दशक के अंत तक 2.5 करोड़ हो जाने का अनुमान

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 29-05-2026
 expected to reach 25 million by the end of the decade.
expected to reach 25 million by the end of the decade.

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
 देश में ऑनलाइन मंचों से जुड़कर काम करने वाले अस्थायी श्रमिकों (गिग वर्कर) की संख्या इस दशक के अंत तक 2.5 करोड़ तक पहुंच सकती है। श्रम मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
 
अभी देश में करीब एक करोड़ गिग वर्कर हैं जिनमें ऐप-आधारित उत्पाद आपूर्ति सेवा और टैक्सी सेवाओं से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं।
 
श्रम मंत्रालय के संयुक्त सचिव और श्रम कल्याण महानिदेशक आशुतोष ए.टी. पेडनेकर ने कहा कि सरकार इस क्षेत्र पर खास ध्यान दे रही है और अस्थायी कामगारों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाएं लाने के लिए कोष प्रबंधकों के साथ चर्चा कर रही है।
 
उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा कि इन श्रमिकों का डेटा एकत्र किया जा रहा है और सभी ऑनलाइन मंचों को 22 जून तक अपने कामगारों का विवरण ई-श्रम पोर्टल पर अद्यतन करना होगा।
 
पेडनेकर ने कहा, "गिग और ऑनलाइन मंच आधारित अर्थव्यवस्था में रोजगार की संभावनाएं बहुत अधिक हैं। अभी करीब एक करोड़ लोग इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं और यह संख्या दशक के अंत तक 2.5 करोड़ तक पहुंच सकती है।"
 
उन्होंने बताया कि नए श्रम कानून के तहत सामाजिक सुरक्षा संहिता को आठ मई को अधिसूचित किया जा चुका है और अब इसे लागू करने की प्रक्रिया जारी है। इसके तहत गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड बनाया जा रहा है।
 
पेडनेकर ने फिक्की-एआईओई और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के एक संयु्क्त कार्यक्रम में कहा कि सरकार इन श्रमिकों के लिए दुर्घटना और मातृत्व से जुड़ी सामाजिक सुरक्षा योजनाएं भी लागू करने की तैयारी में है।
 
ई-श्रम पोर्टल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इससे कामगारों को मिलने वाले लाभों की वास्तविक समय में जानकारी मिल सकेगी और लाभों को एक जगह से दूसरी जगह इस्तेमाल करना भी आसान होगा।
 
इस अवसर पर आईएलओ की वरिष्ठ अधिकारी मिचिको मियामोतो ने कहा कि भारत में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म आधारित अर्थव्यवस्था तेजी से मुख्यधारा का हिस्सा बन रही है और यह रोजगार एवं आय के नए अवसर पैदा कर रही है।