रुपया 53 पैसे मजबूत होकर 95.05 प्रति डॉलर पर

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 29-05-2026
Rupee strengthens by 53 paise to 95.05 per dollar
Rupee strengthens by 53 paise to 95.05 per dollar

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में शुक्रवार को रुपया अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 53 पैसे मजबूत होकर 95.05 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर बढ़ी उम्मीद से बाजार धारणा मजबूत होने के बीच रुपया मजबूत हुआ।
 
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट और डॉलर में कमजोरी से भी रुपये को समर्थन मिला। अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम को 60 दिन और बढ़ाने पर सहमति बनने के बाद यह रुख देखने को मिला।
 
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.77 प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान यह 94.97 के उच्चस्तर और 95.78 के निचले स्तर तक गया। अंत में रुपया 95.05 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा, जो पिछले बंद भाव से 53 पैसे की बढ़त है।
 
बुधवार को रुपया 12 पैसे मजबूत होकर 95.58 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
 
ईद-उल-अजहा के कारण बृहस्पतिवार को घरेलू शेयर और विदेशी मुद्रा बाजार बंद थे।
 
मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा, ‘‘हमारा अनुमान है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर बढ़ी उम्मीदों के कारण रुपये में मामूली सकारात्मक रुख रहेगा। हालांकि इस समझौते पर डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के सर्वोच्च नेता की मंजूरी मिलना अभी बाकी है।’’
 
उन्होंने कहा, "कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और डॉलर के कमजोर होने से भी रुपये को मजबूती मिली। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच कोई नया तनाव बढ़ने पर रुपये पर दबाव भी आ सकता है। डॉलर के मुकाबले रुपये का हाजिर भाव 94.70 से 95.60 के दायरे में रहने का अनुमान है।"
 
इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.11 प्रतिशत बढ़कर 99.13 पर रहा।
 
अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 1.81 प्रतिशत की गिरावट के साथ 92.01 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
 
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि अब बाजार की नजर तीन से पांच जून तक होने वाली भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक पर है।
 
विशेषज्ञों के अनुसार, आरबीआई ब्याज दरों में वृद्धि या यथास्थिति बनाए रखने का फैसला कर सकता है। हालांकि, बड़ा सवाल यह है कि क्या केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति नियंत्रण के साथ मुद्रा स्थिरता को भी प्राथमिकता देगा।