आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
देश में शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान तेजी से बढ़ा, लेकिन कुल पूंजी प्रवाह चालू खाता घाटे (सीएडी) की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं रहा। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में शुद्ध एफडीआई प्रवाह 7.7 अरब डॉलर रहा, जो वित्त वर्ष 2024-25 के एक अरब डॉलर से बहुत अधिक है। यह 2023-24 में 10.2 अरब डॉलर और 2022-23 में 28 अरब डॉलर रहा था।
पिछले वित्त वर्ष में सकल एफडीआई प्रवाह बढ़कर 94.5 अरब डॉलर हो गया जो एक साल पहले 80.6 अरब डॉलर था।
हालांकि, विदेशी निवेशकों द्वारा अपना मुनाफा भारत से ले जाने और निवेश की गई राशि निकालने की मात्रा बढ़कर 53.6 अरब डॉलर हो गई। इस दौरान भारतीय कंपनियों का विदेशों में निवेश 33.3 अरब डॉलर तक पहुंच जाने से कुल शुद्ध निवेश प्रवाह में बढ़त सीमित रही।
आरबीआई ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में पूंजी प्रवाह के भीतर एफडीआई, सकल और शुद्ध दोनों आधार पर बढ़ा। एफडीआई मार्केट्स के मुताबिक, भारत नई एफडीआई घोषणाओं के मामले में अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर रहा।
रिपोर्ट के मुताबिक, सेवा क्षेत्र में एफडीआई इक्विटी प्रवाह का सबसे बड़ा हिस्सा रहा और उसके बाद विनिर्माण क्षेत्र का स्थान रहा। सिंगापुर, अमेरिका, मॉरीशस, जापान, नीदरलैंड और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से कुल प्रवाह का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा आया।
हालांकि, आरबीआई ने कहा कि समीक्षाधीन अवधि में वैश्विक निवेश माहौल चुनौतीपूर्ण बना रहा। अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान शुद्ध पूंजी प्रवाह घटा और चालू खाता घाटे की भरपाई से कम रहा, जिससे भुगतान संतुलन के आधार पर (मूल्यांकन प्रभाव को छोड़कर) विदेशी मुद्रा भंडार में 30.8 अरब डॉलर की गिरावट आई।