मुंबई, (महाराष्ट्र)
रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) टाटा संस में हो रही गतिविधियों पर नज़र रख रहा है और साथ ही 'अपर लेयर NBFC' के तौर पर नियमों का पालन करने की योजनाओं के बारे में कंपनी की ओर से आधिकारिक जानकारी का इंतज़ार कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, टाटा संस ने सेंट्रल बैंक को बताया है कि वह इस प्रक्रिया में तेज़ी लाएगी और RBI के निर्देशों का पालन करने की दिशा में काम करेगी। कंपनी के बोर्ड ने 17 सितंबर की बैठक में होल्डिंग कंपनी को लिस्ट कराने की प्रक्रिया शुरू करने का फ़ैसला किया था।
सूत्रों का कहना है कि टाटा संस बोर्ड से RBI को अपना जवाब अंतिम रूप देने की उम्मीद है, जिसमें लिस्टिंग प्रक्रिया को पूरा करने के लिए एक मोटा-मोटा टाइमलाइन भी शामिल होगा। ऐसी भी खबरें हैं कि टाटा संस के चेयरमैन नोएल टाटा ने कंपनी से कॉर्पोरेट रीस्ट्रक्चरिंग (कॉर्पोरेट ढांचे में बदलाव) पर विचार करने को कहा है, जिससे शायद नियमों के पालन के तहत लिस्टिंग से बचा जा सके। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस प्रस्ताव में टाटा संस को छोटी होल्डिंग कंपनियों में बांटना शामिल है, ताकि इन कंपनियों को RBI की 'अपर लेयर NBFC' की परिभाषा के तहत तय सीमा से नीचे लाया जा सके।
RBI के एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर ANI को बताया, "इस तरह के किसी भी प्रस्तावित रीस्ट्रक्चरिंग को नियमों से बचने की कोशिश के तौर पर देखा जाएगा और इसे अच्छा नहीं माना जाएगा। हम चाहते हैं कि टाटा संस नियमों का पालन करे और जल्द से जल्द लिस्टिंग की प्रक्रिया शुरू करे।" यह घटनाक्रम RBI द्वारा टाटा संस की उस अर्ज़ी को खारिज करने के बाद हुआ है जिसमें उसने 'कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी' (CIC) के तौर पर अपना रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की मांग की थी। टाटा संस ने 21,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा का कर्ज़ चुकाने और NBFC पर लागू होने वाले रेगुलेटरी फ्रेमवर्क से बाहर निकलने के लिए मार्च 2024 में डी-रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया था।
हालांकि, बाद में RBI ने कंपनी को 'अपर लेयर' कैटेगरी में आने वाली NBFC पर लागू नियमों का पालन करने का निर्देश दिया। टाटा संस को सितंबर 2022 से 'अपर लेयर NBFC' के तौर पर वर्गीकृत किया गया है। RBI के स्केल-बेस्ड रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत, इस कैटेगरी में आने वाली कंपनियों को तय समय-सीमा के भीतर लिस्टिंग समेत कुछ खास रेगुलेटरी ज़रूरतों को पूरा करना होता है।
सूत्रों का कहना है कि टाटा संस ने रेगुलेटरी और लिस्टिंग से जुड़े मुद्दों पर RBI के साथ काफ़ी बातचीत की है। टाटा संस के पब्लिक हुए बिना ही, 'अपर लेयर NBFC' के तौर पर लिस्ट होने की कंपनी की तीन साल की समय-सीमा सितंबर 2025 में खत्म हो गई। इस रेगुलेटरी मामले की वजह से लिस्टिंग का सवाल एक बार फिर कंपनी के अंदर चर्चा का मुख्य विषय बन गया है। लिस्टिंग का मुद्दा टाटा संस और टाटा ट्रस्ट के बीच मतभेद की वजह बन गया है; ये दोनों मिलकर होल्डिंग कंपनी का लगभग 66 प्रतिशत हिस्सा नियंत्रित करते हैं।
17 सितंबर को हुई बोर्ड मीटिंग में, टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने फिर से कहा कि टाटा संस को प्राइवेट कंपनी ही बने रहना चाहिए। टाटा ट्रस्ट होल्डिंग कंपनी को प्राइवेट बनाए रखने के साथ-साथ शापूरजी पलोनजी ग्रुप (जो टाटा संस में एक बड़ा माइनॉरिटी शेयरहोल्डर है) को एग्जिट का रास्ता देने के विकल्पों पर भी विचार कर रहा था।
शापूरजी पलोनजी ग्रुप, जिसके पास टाटा संस की लगभग 18.37 प्रतिशत हिस्सेदारी है, ने लिस्टिंग का समर्थन किया है ताकि वह अपनी हिस्सेदारी से वैल्यू अनलॉक कर सके और अपने स्टेक के बदले फंड जुटा सके।
RBI ने पहले टाटा संस की रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की कोशिश को खारिज कर दिया था और कंपनी को लागू रेगुलेटरी नियमों का पालन करने का निर्देश दिया था। इसलिए, सेंट्रल बैंक के हालिया पत्र-व्यवहार ने इस बात पर ध्यान केंद्रित किया है कि टाटा संस उन आवश्यकताओं को कैसे पूरा करने का इरादा रखती है और क्या वह लिस्टिंग की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी। कंपनी ने 31 मार्च, 2026 तक लगभग 2.01 लाख करोड़ रुपये की कुल संपत्ति की रिपोर्ट की थी, जो इसे RBI के 'अपर लेयर फ्रेमवर्क' के तहत बताई गई 1 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति की सीमा से ऊपर रखती है।