India insurance growth to hinge on AI-led distribution, ecosystem partnerships: McKinsey
नई दिल्ली
मैकिन्से की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के इंश्योरेंस सेक्टर में ग्रोथ का अगला चरण इस बात पर निर्भर करेगा कि इंश्योरेंस कंपनियां पारंपरिक चैनलों से आगे बढ़कर कितनी प्रभावी ढंग से अपना डिस्ट्रीब्यूशन बढ़ाती हैं। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से चलने वाली कस्टमर डिस्कवरी और इकोसिस्टम पार्टनरशिप इंश्योरेंस की पहुंच बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएंगी। मैकिन्से ने कहा कि इंश्योरेंस कंपनियां पारंपरिक डायरेक्ट-टू-कस्टमर (D2C) मॉडल का फिर से मूल्यांकन कर रही हैं, क्योंकि ग्राहक अब AI-पावर्ड सर्च और बातचीत वाले इंटरफेस के जरिए उत्पादों को खोजते और परखते हैं।
पारंपरिक D2C मॉडल काफी हद तक एग्रीगेटर्स और पेड कस्टमर एक्विजिशन चैनलों पर निर्भर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, इसके कारण कस्टमर एक्विजिशन की लागत बढ़ गई है और ग्राहकों के साथ सीधे संबंध बनाने में इंश्योरेंस कंपनियों की भूमिका सीमित हो गई है। मैकिन्से ने कहा, "भारतीय इंश्योरेंस सेक्टर में ग्रोथ का अगला चरण उत्पादों की उपलब्धता से कम और डिस्ट्रीब्यूशन की प्रभावशीलता से अधिक तय हो सकता है।"
रिपोर्ट में कहा गया है कि इंडस्ट्री में एजेंट-आधारित डिस्कवरी और एक्विजिशन मॉडल उभर सकते हैं, जिनमें AI सिस्टम कस्टमर जर्नी के अहम हिस्सों को मैनेज करेंगे - उत्पाद की खोज और जुड़ाव से लेकर कन्वर्जन और क्रॉस-सेलिंग तक - और यह सब इंश्योरेंस कंपनियों के अपने प्लेटफॉर्म और पार्टनर इकोसिस्टम पर होगा।
मैकिन्से ने इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन में इकोसिस्टम के बढ़ते महत्व पर भी जोर दिया। इंश्योरेंस कंपनियां ऐसे इकोसिस्टम को न केवल अतिरिक्त डिस्ट्रीब्यूशन चैनल के रूप में देख रही हैं, बल्कि ग्राहकों के साथ जुड़ाव के लिए लॉन्ग-टर्म प्लेटफॉर्म के रूप में भी देख रही हैं, जिससे ग्राहकों को बनाए रखने और पॉलिसीधारकों के साथ गहरे संबंध बनाने में मदद मिल सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि टियर-3 और ग्रामीण बाजारों में इंश्योरेंस कवरेज का विस्तार करना एक और बड़ी चुनौती है। इसमें बताया गया है कि इन बाजारों में कम पहुंच केवल डिस्ट्रीब्यूशन की पहुंच का सवाल नहीं है, बल्कि यह मौजूदा उत्पादों और डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल और उन उपभोक्ताओं की जरूरतों के बीच बेमेल स्थिति को भी दर्शाता है जिनकी जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं।
मैकिन्से के अनुसार, पारंपरिक इंश्योरेंस उत्पाद, ऑनबोर्डिंग प्रक्रियाएं और जुड़ाव के मॉडल जटिल और महंगे हो सकते हैं और इन्हें मुख्य रूप से शहरी ग्राहकों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है, जिससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के लिए इनकी उपयुक्तता सीमित हो जाती है। इस अंतर को पाटने के लिए, कुछ इंश्योरेंस कंपनियां उत्पादों और डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल को फिर से डिजाइन कर रही हैं ताकि इंश्योरेंस को अधिक सुलभ और किफायती बनाया जा सके और साथ ही छोटे शहरों और ग्रामीण बाजारों में ग्राहकों का भरोसा भी बढ़ाया जा सके।
रिपोर्ट में अंडरराइटिंग को भी एक ऐसे क्षेत्र के रूप में पहचाना गया है जहां AI इंश्योरेंस वैल्यू चेन में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है। भविष्य का एक संभावित मॉडल कस्टमर की जानकारी लेने, डेटा को बेहतर बनाने, रिस्क का आकलन करने, कीमत तय करने, मंज़ूरी देने, कोटेशन बनाने और पॉलिसी जारी करने जैसे कामों को एक ही AI-आधारित वर्कफ़्लो में जोड़ सकता है। इससे अंडरराइटर उन कामों पर ज़्यादा समय दे पाएँगे जिनमें इंसानी समझ की ज़रूरत होती है, जैसे कस्टमर और ब्रोकर के साथ बातचीत, अपवादों को संभालना और पोर्टफ़ोलियो मैनेजमेंट।
मैकिन्से ने कहा, "बीमा कंपनियाँ शायद AI-आधारित फ़ैसले लेने की दिशा में एक व्यवस्थित बदलाव के ज़रिए इस बदलाव को अनुभव करेंगी।" यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (IRDAI) ने देश के बीमा वितरण ढांचे में बदलाव का प्रस्ताव दिया है। प्रस्तावित बड़े बदलावों में खर्च की सीमा कम करना, कमीशन के ढांचे में बदलाव और गलत तरीके से बिक्री (mis-selling) को रोकने के लिए मज़बूत सुरक्षा उपाय शामिल हैं। इन घटनाक्रमों से पता चलता है कि टेक्नोलॉजी, वितरण की दक्षता और रेगुलेटरी बदलाव भारत के बीमा क्षेत्र के अगले चरण को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।