अमेरिका ईरान युद्ध से तेल महंगा, छह सप्ताह के उच्चतम स्तर पर

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 09-09-2026
Oil prices rise due to US-Iran conflict, hitting a six-week high.
Oil prices rise due to US-Iran conflict, hitting a six-week high.

 

तेहरान

अमेरिका और ईरान के बीच जारी लंबे युद्ध का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं। बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 100.19 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। यह करीब छह सप्ताह का सबसे ऊंचा स्तर है।

हालांकि, बाद में तेल की कीमत में मामूली गिरावट दर्ज की गई। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार सुबह 8:02 बजे तक ब्रेंट क्रूड 99.93 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। वहीं, अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI की कीमत 94.52 डॉलर प्रति बैरल रही।

तेल की कीमतों में यह उछाल ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव लगातार बना हुआ है। युद्ध की शुरुआत के बाद दोनों देशों के बीच संघर्ष रोकने के लिए समझौते की कोशिश भी हुई थी। हालांकि, वह लंबे समय तक कायम नहीं रह सकी।

युद्धविराम समझौता भी नहीं रोक सका तनाव

रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था। इसके बाद दोनों देशों ने 17 जून को ‘इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन’ पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत 60 दिनों के युद्धविराम की घोषणा की गई थी।

लेकिन यह समझौता अपनी पूरी अवधि तक नहीं चल सका। ईरान ने 13 जुलाई को ही इससे अलग होने का फैसला कर लिया। इसके बावजूद समझौते को दोबारा लागू करने की संभावना बनी हुई थी। हालांकि, 18 अगस्त को इसकी अवधि समाप्त हो गई और दोनों देशों के बीच तनाव फिर बढ़ने लगा।

तनाव बढ़ने का असर सीधे ऊर्जा बाजार पर पड़ा। अगस्त के आखिरी सप्ताह से कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी देखी जाने लगी। निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों की चिंता मुख्य रूप से इस बात को लेकर है कि अगर संघर्ष और लंबा खिंचता है तो मध्य पूर्व से तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

युद्ध से तेल आपूर्ति पर खतरा

बाजार नियामक कैपिटल इकोनॉमिक्स के जलवायु और कमोडिटी अर्थशास्त्री हमाद हुसैन ने रॉयटर्स से बातचीत में कहा कि तेल की कीमतों में मौजूदा बढ़ोतरी की मुख्य वजह मध्य पूर्व में जारी लंबा युद्ध और उससे पैदा हुआ तेल आपूर्ति का संकट है।

उनके मुताबिक जब तक युद्ध की स्थिति में सुधार नहीं होता, तब तक तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट की उम्मीद करना मुश्किल है।

मध्य पूर्व दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है। ऐसे में यहां लंबे समय तक सैन्य संघर्ष रहने से तेल उत्पादन और उसकी आपूर्ति दोनों प्रभावित होने की आशंका रहती है। बाजार में इसी जोखिम के कारण कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है।

‘सुरक्षा प्रीमियम’ बढ़ने की आशंका

बाजार विश्लेषक एबेक्स मार्केट्स के सह अध्यक्ष जेफरी क्यूरी ने भी तेल की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर चिंता जताई है।

उनका कहना है कि बाजार फिलहाल ईंधन की कीमतों में हुई वृद्धि को अलग या अस्थायी घटना के तौर पर देखने की कोशिश कर रहा है। लेकिन उनके मुताबिक यह केवल कुछ दिनों की समस्या नहीं है। यह एक संरचनात्मक संकट का संकेत है।

क्यूरी ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियां जल्द खत्म होने वाली नहीं हैं। उनके अनुसार बाजार में पैदा हुआ जोखिम एक तरह के ‘सुरक्षा प्रीमियम’ को जन्म दे रहा है। अगर क्षेत्रीय तनाव जारी रहता है तो यह प्रीमियम समय के साथ और बढ़ सकता है।

इसका मतलब यह है कि तेल खरीदार और कारोबारी भविष्य में आपूर्ति बाधित होने के जोखिम को देखते हुए अतिरिक्त कीमत चुकाने के लिए तैयार हो सकते हैं। इससे कच्चे तेल की कीमतों पर लंबे समय तक दबाव बना रह सकता है।

आम लोगों पर भी पड़ सकता है असर

कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार तक सीमित नहीं रहता। इसका प्रभाव पेट्रोल, डीजल और अन्य ईंधनों की कीमतों पर भी पड़ सकता है। इसके अलावा परिवहन लागत बढ़ने से कई दूसरी वस्तुओं की कीमतों पर भी दबाव बन सकता है।

यदि अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष लंबा खिंचता है और मध्य पूर्व से तेल की आपूर्ति प्रभावित होती है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

बाजार पहले से ही इस संभावना पर नजर रख रहा है कि आने वाले दिनों में तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से ऊपर टिकती है या नहीं। बुधवार को ब्रेंट क्रूड का 100.19 डॉलर तक पहुंचना बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

फिलहाल तेल बाजार की दिशा अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की स्थिति पर काफी हद तक निर्भर दिखाई दे रही है। अगर दोनों देशों के बीच तनाव कम होता है और तेल आपूर्ति सामान्य रहती है तो कीमतों पर दबाव घट सकता है। लेकिन सैन्य संघर्ष बढ़ने या आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी की आशंका बनी रहेगी।

यही वजह है कि निवेशकों की नजर अब मध्य पूर्व की सैन्य स्थिति के साथ तेल उत्पादन और आपूर्ति मार्गों पर भी है। आने वाले दिनों में अमेरिका ईरान संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक बना रह सकता है।