Michael Bloomberg meets Gautam Adani, discusses India’s clean energy transition and infrastructure growth
नई दिल्ली
ब्लूमबर्ग के सह-संस्थापक माइकल ब्लूमबर्ग ने 'ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम' में अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने भारत के विकास के रोडमैप, ऊर्जा परिवर्तन (एनर्जी ट्रांजिशन), मजबूत शहरी बुनियादी ढांचे और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे विषयों पर चर्चा की। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में...यह टिप्पणी अडानी की एक पिछली पोस्ट के जवाब में आई, जिसमें उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं के बीच वैश्विक जलवायु कार्रवाई (क्लाइमेट एक्शन) को तेज करने और टिकाऊ बुनियादी ढांचे को लेकर एक सार्थक चर्चा हुई।
"नई दिल्ली में 'ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम' में @MikeBloomberg से मिलकर खुशी हुई। वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन, मजबूत शहरी बुनियादी ढांचे, AI के भविष्य और टिकाऊ विकास को तेज करने पर बहुत ही सार्थक चर्चा हुई। जलवायु कार्रवाई के प्रति माइक का विजन और प्रतिबद्धता लगातार प्रेरित करती है!!" नई दिल्ली में माइकल ब्लूमबर्ग के साथ अपनी मुलाकात के बाद, बुधवार को लिंक्डइन (LinkedIn) पर एक पोस्ट में अडानी ने कहा कि यह बदलाव (ट्रांजिशन) इस बात पर निर्भर करेगा कि स्वच्छ ऊर्जा को आर्थिक रूप से व्यावहारिक कैसे बनाया जाए, और साथ ही भारत के विकास के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे का विस्तार कैसे किया जाए।
उन्होंने लिखा, "डीकार्बोनाइजेशन (कार्बन उत्सर्जन कम करना) कोई ऐसा वैचारिक आदेश नहीं हो सकता, जिससे आम नागरिकों पर आर्थिक बोझ पड़े, कारखाने बंद हो जाएं या 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों) का विकास रुक जाए।" अडानी ने कहा कि इस बदलाव को सफल बनाने के लिए स्वच्छ ऊर्जा को घरों और व्यवसायों के लिए एक भरोसेमंद और किफायती विकल्प बनना होगा। उन्होंने ग्रीन एनर्जी अपनाने की अतिरिक्त लागत को कम करने की जरूरत पर जोर दिया, और साथ ही जलवायु अस्थिरता के बीच मौजूदा ऊर्जा प्रणालियों पर लगातार निर्भर रहने को लेकर आगाह भी किया।
उन्होंने कहा, "वास्तविक प्रगति के लिए पूंजी, नीति और क्रियान्वयन (एग्जीक्यूशन) का एक साथ आना जरूरी है, ताकि 'ग्रीन प्रीमियम' (हरित ऊर्जा की अतिरिक्त लागत) को कम किया जा सके। ऐसा तब तक होना चाहिए जब तक कि स्वच्छ ऊर्जा स्पष्ट रूप से सबसे सस्ता और बेहतर विकल्प न बन जाए।" अडानी समूह के चेयरमैन ने इस बात पर भी जोर दिया कि आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए भारत को अपनी बिजली आपूर्ति, औद्योगिक क्षमता और डिजिटल पहुंच का विस्तार करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक विकास के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे में केवल बंदरगाह, ट्रांसमिशन कॉरिडोर, ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट और कंप्यूटिंग सुविधाओं जैसी भौतिक संपत्तियां ही शामिल नहीं हैं। उन्होंने कहा कि विश्वसनीय डेटा, जवाबदेह संस्थान और प्रभावी शासन (गवर्नेंस) भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा, "राष्ट्र-निर्माण के लिए चार अनिवार्य तत्वों की आवश्यकता होती है: धैर्यवान पूंजी (पेशेंट कैपिटल), भौतिक क्रियान्वयन, पारदर्शी शासन और सक्षम स्थानीय नेतृत्व।"
ब्लूमबर्ग के साथ हुई इस मुलाकात में शहरी विकास, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, उन्नत विनिर्माण (एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग) और हरित बुनियादी ढांचे जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। अडानी ने मुंबई की धारावी पुनर्विकास परियोजना का जिक्र करते हुए कहा कि इसकी सफलता का आकलन इस आधार पर नहीं किया जाना चाहिए कि कितना रियल एस्टेट विकसित हुआ है, बल्कि इस आधार पर होना चाहिए कि वहां रहने वालों के जीवन स्तर और आजीविका में कितना सुधार आया है।
उन्होंने कहा कि अगर बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ समुदाय का भरोसा और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों की सुरक्षा को भी जोड़ा जाए, तो यह परियोजना शहरी पुनर्विकास के लिए एक मिसाल बन सकती है।
भारत की विकास प्राथमिकताओं पर बात करते हुए, अडानी ने कहा कि बुनियादी ढांचे को अंततः इस आधार पर परखा जाना चाहिए कि लोग इसके जरिए क्या हासिल कर पा रहे हैं, न कि इस आधार पर कि कितनी संपत्तियां बनाई गई हैं। ब्लूमबर्ग ने मंगलवार को दिल्ली में 'ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम' को संबोधित किया। एक पोस्ट के अनुसार, उन्होंने वहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्रों में भारत की प्रगति के बारे में बात की।