ग्लोबल टूरिज़्म मज़बूत हो रहा है, लेकिन पर्यटकों की बढ़ती संख्या से व्यापक फ़ायदे नहीं मिल पा रहे हैं: WEF

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 25-09-2026
Global tourism strengthens, but rising visitor numbers fail to deliver wider benefits: WEF
Global tourism strengthens, but rising visitor numbers fail to deliver wider benefits: WEF

 

नई दिल्ली 
 
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की एक रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि ज़्यादातर देशों में ग्लोबल टूरिज़्म मज़बूत हुआ है, लेकिन पर्यटकों की बढ़ती संख्या से बड़े पैमाने पर आर्थिक और सामाजिक फ़ायदे नहीं हो रहे हैं। WEF के अनुसार, कई डेस्टिनेशन (पर्यटन स्थल) रिकॉर्ड टूरिज़्म डिमांड को लंबे समय के फ़ायदों में बदलने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इसकी वजहें हैं - बढ़ती लागत, जियोपॉलिटिकल और क्लाइमेट से जुड़ी दिक्कतें, लेबर की कमी और इंफ्रास्ट्रक्चर व स्थानीय समुदायों पर बढ़ता दबाव। यह सब 2026 ट्रैवल एंड टूरिज़्म डेवलपमेंट इंडेक्स (TTDI) में व्यापक सुधार के बावजूद हो रहा है। यह इंडेक्स उन कारकों और नीतियों को मापता है जो ट्रैवल और टूरिज़्म के टिकाऊ और मज़बूत विकास में मदद करते हैं।
 
रिपोर्ट के अनुसार, "2026 ट्रैवल एंड टूरिज़्म डेवलपमेंट इंडेक्स (TTDI) में शामिल 110 अर्थव्यवस्थाओं में से 92% ने 2024 के बाद से अपने स्कोर में सुधार किया है, जिसमें जापान टॉप पर है," जबकि औसत स्कोर में 2.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। महामारी के बाद से टूरिज़्म डेवलपमेंट की स्थितियां सबसे मज़बूत हैं, जिसमें सांस्कृतिक आकर्षणों, टूरिज़्म इंफ्रास्ट्रक्चर और सेवाओं, और हवाई कनेक्टिविटी में सुधार मुख्य कारण हैं। साथ ही, सांस्कृतिक संसाधन "TTDI में सबसे ज़्यादा सुधार वाला स्तंभ (पिलर) रहे, जिसमें 95% से ज़्यादा अर्थव्यवस्थाओं ने बेहतर स्कोर दर्ज किया।"
 
WEF ने यह भी बताया कि "2025 में अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या रिकॉर्ड 1.5 बिलियन तक पहुंच गई, जो 2024 से 5% और 2019 के स्तर से 4.4% ज़्यादा है।" इसमें बताया गया कि मध्य पूर्व और अफ्रीका में सबसे ज़्यादा ग्रोथ दर्ज की गई, जबकि एशिया-पैसिफिक महामारी से पहले के ट्रैवल स्तर के अंतर को कम करता रहा। हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि "2024 और 2026 के बीच, चार में से तीन अर्थव्यवस्थाओं में ट्रैवल कम किफायती हो गया, जबकि टूरिज़्म में निवेश बढ़ती मांग के साथ तालमेल नहीं बिठा पाया और लेबर की कमी ने आगे की ग्रोथ के लिए खतरा पैदा कर दिया।"
 
इस दौरान स्थानीय समुदायों को मिलने वाले फ़ायदों में भी कमी आई, जो यह दिखाता है कि पर्यटकों की संख्या बढ़ने से ज़रूरी नहीं कि बेहतर आजीविका या अच्छी क्वालिटी की नौकरियां मिलें, खासकर उन जगहों पर जो मौसमी टूरिज़्म पर बहुत ज़्यादा निर्भर हैं। इसमें यह भी बताया गया है कि कई देशों में यात्रा और पर्यटन से जुड़ी कीमतें महंगाई की तुलना में तेज़ी से बढ़ी हैं, जिससे 2024 और 2026 के बीच TTDI-रैंक वाले तीन-चौथाई देशों में कीमत के मामले में प्रतिस्पर्धात्मकता (price competitiveness) कम हुई है।
 
रिपोर्ट में कहा गया है, "सुधार के बावजूद, 2022 से पर्यटन में निवेश, पर्यटन गतिविधियों की तुलना में पीछे रहा है। साथ ही, कर्मचारियों की कमी और स्किल्स की कमी के कारण सर्विस की क्वालिटी और डिजिटल व AI-आधारित बदलावों को अपनाने में रुकावट आने का खतरा है।" 2024 और 2026 के बीच पर्यटन से मिलने वाले आर्थिक और सामाजिक लाभ में भी कमी आई, जबकि भीड़-भाड़ और पर्यटकों के एक ही जगह पर ज़्यादा जमा होने का दबाव महामारी से पहले के स्तर से ज़्यादा बना रहा।
 
रिपोर्ट में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि पर्यटन स्थलों को न केवल पर्यटन को बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए, बल्कि इसके फायदों को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुँचाकर और स्थानीय समुदायों, बुनियादी ढांचे व प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव को कम करके इसे सही ढंग से मैनेज करने पर भी ध्यान देना चाहिए।