AI driving credit risk, may threaten jobs and tax revenues in developed economies: Fitch
नई दिल्ली
फिच रेटिंग्स का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी खर्च ग्लोबल क्रेडिट रिस्क के मुख्य कारण बनकर उभर रहे हैं। AI से जहां काम में तेज़ी और दक्षता बढ़ने की उम्मीद है, वहीं इससे नौकरियां जाने और टैक्स से होने वाली कमाई घटने का खतरा भी है, खासकर विकसित अर्थव्यवस्थाओं में। फिच के अनुसार, हांगकांग, सियोल, सिंगापुर और टोक्यो में निवेशकों और सरकारी क्षेत्र के लोगों ने AI से होने वाले बदलाव, प्राइवेट क्रेडिट में तेज़ी और सॉवरेन रिस्क (सरकारी कर्ज से जुड़ा जोखिम) पर चर्चा केंद्रित की है।
निवेशक काम को पूरा करने में आने वाले जोखिम, ज़्यादा कैपिटल एक्सपेंडिचर (CAPEX), कीमतों पर दबाव और इक्विटी मार्केट से क्रेडिट मार्केट में फैलने वाले संभावित असर पर कड़ी नज़र रख रहे हैं। साथ ही, खास तौर पर तैयार किए गए हाइपरस्केलर कॉन्ट्रैक्ट और फंडिंग की सख्त शर्तें जोखिम बढ़ा रही हैं।
फिच ने कहा कि अकेले प्राइवेट क्रेडिट से कोई बड़ा सिस्टमैटिक फाइनेंशियल रिस्क (पूरी वित्तीय प्रणाली के लिए जोखिम) पैदा होने की संभावना कम है। हालांकि, निवेशकों ने एसेट्स के लिए बढ़ती प्रतिस्पर्धा और फंड फाइनेंसिंग के जटिल स्ट्रक्चर (जैसे NAV लोन) के कारण पारदर्शिता की कमी पर चिंता जताई है। इन जटिल स्ट्रक्चर से लेवरेज (उधार का स्तर) और लेनदारों की रैंकिंग का सही पता लगाना मुश्किल हो सकता है।
एजेंसी ने यह भी कहा कि ज़्यादा रिटर्न की चाह में इस एसेट क्लास में ज़्यादा कैपिटल आने से रिटर्न पर दबाव बढ़ रहा है।
फिच के अनुसार, डायरेक्ट लेंडिंग में कोलेटरलाइज़्ड लोन ऑब्लिगेशन्स (CLOs) की तुलना में डिफ़ॉल्ट दरें ज़्यादा रही हैं, हालांकि रिकवरी दरें काफी अच्छी रही हैं। एजेंसी ने कहा, "इन जोखिमों को मैनेज करने के लिए पोर्टफोलियो में पारदर्शिता और मैनेजर का चुनाव बहुत ज़रूरी है, लेकिन एशिया के निवेशकों को US के मिडिल-मार्केट उधारकर्ताओं के बारे में सीमित जानकारी ही मिल पाती है।"
इसके अलावा, रेटिंग एजेंसी ने इस बात पर भी ध्यान दिलाया कि रिटेल निवेशकों और रिटायरमेंट अकाउंट्स की बढ़ती भागीदारी से लिक्विडिटी और वैल्यूएशन से जुड़े जोखिम बढ़ सकते हैं। ऐसा तब हो सकता है जब एसेट से बाहर निकलने (एग्जिट) में देरी के कारण कैश रिटर्न में देरी हो और मैनेजर लिक्विडिटी के लिए नए फंड्स पर निर्भर रहें।
हालांकि AI से काम में दक्षता बढ़ने की संभावना है, लेकिन इससे नौकरियां भी जा सकती हैं और टैक्स से होने वाली कमाई कम हो सकती है, खासकर विकसित अर्थव्यवस्थाओं में।
एजेंसी ने कहा, "हमारा मानना है कि AI से दक्षता बढ़ेगी, लेकिन लेबर डिस्प्लेसमेंट (कामगारों की जगह मशीनें आना) और टैक्स बेस कम होने से जुड़े जोखिम भी हैं, खासकर विकसित बाज़ारों में।"
फिच ने आगे कहा कि खाड़ी देशों में तनाव और सप्लाई-चेन में रुकावटों के कारण मैक्रो-इकोनॉमिक अस्थिरता बनी हुई है, लेकिन निवेशकों का ध्यान अब तुरंत होने वाले बड़े झटकों से हटकर प्रस्तावित शांति समझौते के बाद पड़ने वाले असर पर चला गया है। एजेंसी ने कहा कि अब तक डायरेक्ट क्रेडिट पर असर कम रहा है, लेकिन चेतावनी दी कि अगर समझौता विफल होता है और तनाव फिर से बढ़ता है, तो जोखिम दोबारा पैदा हो सकते हैं।