बारामूला की गलियों से टीम इंडिया तक: जसप्रीत बुमराह के रिप्लेसमेंट आकिब नबी की पूरी कहानी

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 04-08-2026
From the streets of Baramulla to Team India: The full story of Aaqib Nabi, Jasprit Bumrah's replacement.
From the streets of Baramulla to Team India: The full story of Aaqib Nabi, Jasprit Bumrah's replacement.

 

शांतिप्रिय राय चौधरी

बारामूला की तंग गलियां और सर्दियों में बर्फ से ढके छोटे मैदान। क्रिकेट खेलने के लिए न तो रन-अप की सीधी जगह थी और न ही कोई क्रिकेट अकादमी। यहां बचपन में हर बच्चा फुटबॉल के पीछे भागता था। आकिब नबी भी इनमें से एक थे। लेकिन टीवी पर क्रिकेट मैच देखने के शौक ने उनकी जिंदगी का रास्ता बदल दिया। प्लास्टिक की टेनिस गेंद से शुरू हुआ यह सफर आज भारतीय टेस्ट टीम की ड्रेसिंग रूम तक पहुंच गया है।

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने श्रीलंका दौरे के लिए भारतीय टेस्ट टीम का ऐलान किया है। स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह घुटने की चोट के कारण इस अहम सीरीज से बाहर हो गए हैं। इंग्लैंड के खिलाफ वनडे मैच के दौरान उन्हें यह चोट लगी थी। चयनकर्ताओं ने बुमराह की जगह 29 साल के तेज गेंदबाज आकिब नबी डार को मौका दिया है। यह कहानी सिर्फ एक क्रिकेटर के चयन की नहीं है। यह कहानी कश्मीर के एक छोटे से कस्बे से निकलकर भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े मंच तक पहुंचने के संघर्ष की है।

बारामूला की गलियों से क्लब क्रिकेट तक का सफर

आकिब का जन्म बारामूला में एक साधारण स्कूल शिक्षक के परिवार में हुआ। श्रीनगर से लगभग पचास किलोमीटर दूर स्थित इस इलाके में खेल सुविधाएं बहुत सीमित थीं। ठंड और बारिश के मौसम में महीनों तक खेल बंद रहता था। आकिब ने शुरुआत में टेनिस बॉल क्रिकेट खेला।

साल 2016 के दौरान बारामूला में एक स्थानीय टूर्नामेंट चल रहा था। एक मैच में आकिब ने दबाव के बीच अपनी टीम के लिए एक जुझारू पारी खेली। विरोधी टीम के कप्तान उनकी इस फाइटिंग स्प्रिट से काफी प्रभावित हुए। उन्होंने आकिब को बीसीसीआई रेड्स क्लब से जुड़ने की सलाह दी। आकिब इस क्लब में शामिल हो गए।

उस समय आकिब मुख्य रूप से एक बैटिंग ऑलराउंडर थे। वह निचले क्रम में तेजी से रन बनाते थे। लेकिन क्लब में कड़े अभ्यास और कोचों के मार्गदर्शन में उन्होंने अपनी गेंदबाजी पर काम करना शुरू किया। धीरे-धीरे उनकी तेज गेंदबाजी में निखार आने लगा। देखते ही देखते एक बल्लेबाज ने एक घातक तेज गेंदबाज का रूप ले लिया।

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घरेलू क्रिकेट में शानदार रिकॉर्ड और आंकड़े

आकिब नबी को जम्मू और कश्मीर की ओर से प्रथम श्रेणी क्रिकेट में डेब्यू करने का मौका 2019 में मिला। झारखंड के खिलाफ अपने पहले मैच की पहली पारी में उन्हें कोई सफलता नहीं मिली। लेकिन दूसरी पारी में आकिब ने जबरदस्त वापसी करते हुए 5 विकेट झटके। उनकी इस घातक गेंदबाजी के दम पर जम्मू और कश्मीर ने वह मैच एक पारी के अंतर से जीता।

घरेलू क्रिकेट में आकिब का ग्राफ लगातार ऊपर चढ़ता गया। आंकड़े उनकी निरंतरता और मेहनत की गवाही देते हैं:

  • प्रथम श्रेणी मैच: 43 मुकाबले

  • कुल विकेट: 18.63 की औसत से 162 विकेट

  • रणजी सीजन 2024: 13.93 की औसत से 44 विकेट

  • रणजी सीजन 2025: 17 पारियों में 12.65 की औसत से 60 विकेट

  • दिलीप ट्रॉफी 2025: ईस्ट जोन के खिलाफ लगातार चार गेंदों पर चार विकेट

2025 का घरेलू सीजन आकिब के करियर का सबसे बेहतरीन दौर साबित हुआ। वह उस सीजन में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बने। उन्हें प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया। बंगाल के खिलाफ सेमीफाइनल मुकाबले में उन्होंने मैच में 9 विकेट चटकाए। उनकी इस शानदार गेंदबाजी की बदौलत जम्मू और कश्मीर की टीम अपने 67 साल के इतिहास में पहली बार रणजी ट्रॉफी के फाइनल में पहुंची।

फाइनल मुकाबले में भी आकिब का जलवा कायम रहा। उन्होंने 54 रन देकर 5 विकेट झटके। इस प्रदर्शन के दम पर जम्मू और कश्मीर ने पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब अपने नाम किया।

आईपीएल का इंतजार और भारत 'ए' का प्रदर्शन

घरेलू क्रिकेट में लगातार 100 से ज्यादा विकेट लेने के बावजूद आईपीएल का दरवाजा आकिब के लिए आसानी से नहीं खुला। कई सालों के लंबे इंतजार के बाद दिल्ली कैपिटल्स ने उन्हें अपनी टीम में शामिल किया।

इसके बाद उन्हें भारत 'ए' टीम के साथ श्रीलंका दौरे पर जाने का मौका मिला। वहां दो मैचों में उन्होंने 6 विकेट हासिल किए। आकिब की सीधी गेंदें और इन-स्विंग कराने की क्षमता ने चयनकर्ताओं को काफी प्रभावित किया। जब बुमराह के विकल्प की तलाश शुरू हुई तो चयनकर्ताओं की पहली पसंद आकिब नबी ही बने।

कश्मीर से टेस्ट क्रिकेट तक का नया इतिहास

आकिब नबी जम्मू और कश्मीर के तीसरे ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्हें भारत की सीनियर क्रिकेट टीम में चुना गया है। उनसे पहले परवेज रसूल और उमरान मलिक देश के लिए खेल चुके हैं। लेकिन लाल गेंद के सबसे लंबे फॉर्मेट यानी टेस्ट क्रिकेट में भारतीय टीम से जुड़ने वाले आकिब पहले खिलाड़ी हैं।

अगर 15 अगस्त से गॉल में शुरू हो रहे पहले टेस्ट मैच में आकिब को प्लेइंग इलेवन में जगह मिलती है तो वह जम्मू और कश्मीर के पहले टेस्ट क्रिकेटर बन जाएंगे। भारत और श्रीलंका के बीच दो टेस्ट मैचों की यह सीरीज आईसीसी विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। दूसरा टेस्ट मैच 23 अगस्त से कोलंबो में खेला जाएगा।

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पूरे जम्मू-कश्मीर में जश्न का माहौल

आकिब के चयन की खबर मिलते ही बारामूला और पूरे कश्मीर में खुशी की लहर दौड़ गई। क्रिकेट फैंस सड़कों पर उतर आए और एक-दूसरे को मिठाई बांटकर जश्न मनाया। बारामूला के युवा आकिब को अपना रोल मॉडल मान रहे हैं।

जम्मू और कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन ने उनके चयन पर खुशी जताई है। अधिकारियों का कहना है कि यह आकिब की सालों की कड़ी तपस्या का फल है। सीमित संसाधनों के बावजूद जिस तरह से आकिब ने अपनी पहचान बनाई है, उससे राज्य के हजारों युवा खिलाड़ियों को नई दिशा मिलेगी। अब घाटी के क्रिकेट प्रेमियों की नजरें 15 अगस्त पर टिकी हैं जब उनका यह सितारा नीली टोपी पहनकर मैदान पर उतरेगा।