आईपीएस सारा रिज़वी : मुश्किलों को मात देकर बनीं मिसाल

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 23-03-2026
IPS Sara Rizvi: Overcoming Adversity to Become an Inspiration
IPS Sara Rizvi: Overcoming Adversity to Become an Inspiration

 

एहसान फाजिली | श्रीनगर

उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक रूप से समृद्ध जिले अमरोहा से ताल्लुक रखने वाली सारा रिज़वी का बचपन मुंबई में बीता। मुंबई में पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने सिविल सेवा में जाने का सपना देखा था। लेकिन उनका यह सफर चुनौतियों से भरा रहा। गुजरात कैडर की 2008 बैच की यह जांबाज आईपीएस अधिकारी वर्तमान में जम्मू-कश्मीर के उधमपुर-रियासी रेंज में डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (DIG) के पद पर तैनात हैं। वे 2022 से प्रतिनियुक्ति (deputation) पर जम्मू-कश्मीर में अपनी सेवाएं दे रही हैं। उनकी मेहनत और काबिलियत को देखते हुए इसी साल जनवरी में उन्हें इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (IG) के पद पर पदोन्नत किया गया है।

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सारा रिज़वी जम्मू-कश्मीर की इकलौती महिला पुलिस अधिकारी हैं जो डीआईजी या आईजी जैसे ऊंचे रैंक पर काबिज हैं। उनका परिवार शिक्षकों, विद्वानों, डॉक्टरों और इंजीनियरों से भरा था। लेकिन सारा को सामाजिक जिम्मेदारी उठाने की प्रेरणा अपने नाना से मिली। उन्होंने बहुत कम उम्र में अपनी मां को खो दिया था। इसके बाद उनके नाना ने ही उनका पालन-पोषण किया जो पेशे से वकील थे। नाना के आदर्शों ने ही सारा के मन में समाज सेवा का बीज बोया।

उन्होंने कॉमर्स में ग्रेजुएशन किया। आर्थिक तंगहाली के कारण उन्हें निजी नौकरी भी करनी पड़ी ताकि वे सिविल सेवा की तैयारी का खर्च उठा सकें। उन्होंने ट्यूशन पढ़ाकर पैसे जुटाए और अपनी पढ़ाई जारी रखी। कड़े संघर्ष और अटूट मेहनत के दम पर उन्होंने साल 2008 में अपने तीसरे प्रयास में यह प्रतिष्ठित परीक्षा पास की।

 

जब लगा कि जिंदगी अब पटरी पर आ गई है, तब नियति ने उनके सामने एक और बड़ी चुनौती पेश की। कोविड के दौरान उन्होंने अपने पति को खो दिया। आज वे एक सिंगल मदर हैं और अपनी पांच साल की बेटी की जिम्मेदारी के साथ-साथ अपनी ड्यूटी को पूरी शिद्दत से निभा रही हैं। निजी जीवन के दुखों से ध्यान हटाकर खुद को काम में झोंकने के लिए उन्होंने चुनौतीपूर्ण कार्यों को चुना। इसी मकसद से वे 2022 में गुजरात से ट्रांसफर लेकर जम्मू-कश्मीर आईं।

मौजूदा पद संभालने से पहले सारा रिज़वी ने कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं। वे पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो में एसएसपी (ट्रेनिंग) रहीं। जम्मू-कश्मीर पुलिस मुख्यालय में डीआईजी (प्रशासन) के तौर पर भी काम किया। गुजरात में अपनी सेवा के दौरान वे राजकोट (ग्रामीण) की एएसपी और जामनगर की एसएसपी रहीं। इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में कश्मीर डेस्क की असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में उनका अनुभव काफी महत्वपूर्ण रहा। इसके अलावा उन्होंने सिक्किम के गंगटोक में 'सब्सिडियरी इंटेलिजेंस ब्यूरो' के प्रमुख के रूप में भी काम किया।

उनके करियर में कई जटिल मिशन शामिल रहे हैं। 2012 के गुजरात विधानसभा चुनाव और 2014 के लोकसभा चुनावों में उन्होंने कानून व्यवस्था संभाली। 2016-17 में सिक्किम और पश्चिम बंगाल में गोरखा लैंड आंदोलन के दौरान उनकी भूमिका अहम रही। 2017 में भारत और चीन के बीच हुए डोकलाम विवाद के समय भी वे मोर्चे पर तैनात थीं। हाल ही में हुए 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में उन्हें जम्मू-कश्मीर के लिए चुनाव व्यय का नोडल अधिकारी बनाया गया था।

उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए उन्हें कई बार सम्मानित किया गया है। उन्हें 'पुलिस विशेष कर्तव्य पदक' और 'पुलिस आंतरिक सुरक्षा सेवा पदक' से नवाजा जा चुका है। आईबी के डायरेक्टर और जम्मू-कश्मीर के डीजीपी ने भी उनकी उत्कृष्ट सेवाओं की सराहना की है। साल 2024 के चुनावों में बेहतर काम के लिए उन्हें जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल (LG) की ओर से भी प्रशंसा पत्र मिला है।

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सारा रिज़वी की कहानी हमें सिखाती है कि चाहे मुश्किलें कितनी भी बड़ी क्यों न हों, अगर इंसान के इरादे मजबूत हों तो वह हर बाधा को पार कर सकता है। वे आज की पीढ़ी के लिए साहस और समर्पण की एक जीती-जागती मिसाल हैं।