धर्म से ऊपर, जनता के करीब: मुमताज थाहा ने भाजपा में बनाई पहचान

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 07-03-2026
Above religion, close to the people: Mumtaz Thaha has made a mark in the BJP
Above religion, close to the people: Mumtaz Thaha has made a mark in the BJP

 

श्रीलता एम/ त्रिशूर

पिछले साल अगस्त में जब मुमताज थाहा ने त्रिशूर नगर निगम के कन्नानकुलंगरा वार्ड से जीत हासिल की, तो यह सिर्फ एक चुनावी जीत नहीं थी। मुमताज ने त्रिशूर नगर निगम के इतिहास में पहली मुस्लिम महिला पार्षद बनकर एक नया अध्याय लिख दिया। सबसे दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने भाजपा की उम्मीदवार के तौर पर उस वार्ड में जीत दर्ज की, जहां लगभग 90 फीसदी मतदाता हिंदू समुदाय से हैं।

मुमताज के लिए उनकी धार्मिक पहचान कभी भी राजनीति का आधार नहीं रही। वे कहती हैं, "वोटरों और पार्टी के लिए मैं सिर्फ एक मुस्लिम नहीं थी। मैं कन्नानकुलंगरा की बेटी थी।" इसी अपनेपन के अहसास ने उन्हें उन संशयों और सवालों से उबरने में मदद की, जो लोग अक्सर उनसे पूछते थे,खासकर यह कि उन्होंने भाजपा को ही क्यों चुना?

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चुनाव प्रचार के दौरान यह सवाल उनका साया बनकर पीछे रहा। कन्नानकुलंगरा में पहले भाजपा के हिंदू पार्षद थे, इसलिए उम्मीदवार का प्रोफाइल बदलते ही लोगों में उत्सुकता जगी।

मुमताज बताती हैं, "लोग जानना चाहते थे कि मैं कौन हूं और भाजपा में क्यों हूं।" मुमताज ने इसका जवाब बार-बार लोगों के घर जाकर दिया। वे कहती हैं, "दूसरी-तीसरी मुलाकात के बाद हिचक कम होने लगी और विश्वास जमने लगा।"

 

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जयललिता से मिली प्रेरणा

38 साल की मुमताज की राजनीति में दिलचस्पी किसी चुनावी महत्वाकांक्षा से नहीं हुई।

उनका परिवार तमिलनाडु से गहराई से जुड़ा रहा है। बचपन में उन्होंने तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता की कहानियां सुनीं, जिन्हें वे आज भी आदर से 'जियम्मा' कहती हैं। चेन्नई में उनके पारिवारिक दोस्त अन्नाद्रमुक (AIADMK) में सक्रिय थे।

2016 में जयललिता के निधन के बाद उनके कई दोस्तों ने भाजपा का दामन थाम लिया।

उन्हीं में से एक ने मुमताज का नाम चेन्नई में पार्टी नेतृत्व को सुझाया। हालांकि तमिलनाडु में उनका सफर छोटा रहा और कुछ साल बाद वे वापस त्रिशूर लौट आईं। उनके पिता ने उन्हें केरल में राजनीतिक जमीन तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया। मुमताज ने 2024 के लोकसभा चुनाव में अभिनेता सुरेश गोपी के लिए जमकर प्रचार किया। इसी अनुभव ने उन्हें निगम चुनाव लड़ने के लिए तैयार किया।

चुनौतियां और समुदाय की प्रतिक्रिया

भाजपा को चुनने का फैसला मुमताज के लिए आसान नहीं था। उन्हें न केवल पार्टी के भीतर बल्कि अपने समुदाय में भी संघर्ष करना पड़ा। वे मानती हैं कि कुछ रिश्तेदार उनके फैसले से खुश नहीं हैं।

भाजपा की अल्पसंख्यक विरोधी छवि पर वे कहती हैं, "यह सिर्फ एक कहानी है जो मेरे व्यक्तिगत अनुभव से मेल नहीं खाती। मेरे समुदाय के बहुत से लोग बदलती हकीकत को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं।" वे उदाहरण देती हैं कि त्रिशूर में भाजपा के जिला अध्यक्ष एक ईसाई हैं, जो पार्टी की सर्वधर्म स्वीकार्यता को दर्शाता है।

मुमताज भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा का हिस्सा हैं। उनका मुख्य ध्यान मुस्लिम महिलाओं की शिक्षा पर है। उनका मानना है कि शिक्षा ही महिलाओं को सही फैसला लेने का आत्मविश्वास देती है।

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निजी जीवन और काम के बीच संतुलन

पार्षद बनने के बाद मुमताज की व्यस्तता काफी बढ़ गई है। उनके 13 साल के बेटे की देखभाल उनकी मां करती हैं। उनके पति और पिता, जो साथ में बिजनेस करते हैं, मुमताज के सबसे बड़े समर्थक हैं। मुमताज अपने वार्ड में 'नाला' (Nala) नाम से एक पेट ग्रूमिंग सेंटर (पालतू जानवरों की सफाई का केंद्र) भी चलाती हैं। 'नाला' का अर्थ स्वाहिली भाषा में 'रानी' होता है। यहीं से वे अपने वार्ड की बैठकों और लोगों से संवाद का काम भी संभालती हैं।

भविष्य की योजनाओं पर मुमताज कहती हैं कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान इन पांच सालों पर है। वे जयललिता की प्रशंसक जरूर हैं, लेकिन अपनी तुलना उनसे नहीं करना चाहतीं। मुमताज कहती हैं, "जयललिता बनने के लिए आग पर चलना पड़ता है। उनकी जगह कोई नहीं ले सकता।" वे बस उनकी कार्यशैली को अपनाना चाहती हैं, जो जमीन से जुड़कर काम करने में विश्वास रखती थीं।

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मुमताज के लिए राजनीति का मतलब पद पर कब्जा करना नहीं, बल्कि जनता का विश्वास जीतना है। वे अपने वार्ड की समस्याओं को सुलझाने और विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास का पुल बनाने में जुटी हैं।