एएमयू में AI पर विशेष व्याख्यान, मीडिया, लाइब्रेरी और शिक्षा में एआई की भूमिका पर चर्चा

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 15-10-2026
Special lecture on AI at AMU; discussion on the role of AI in media, libraries, and education.
Special lecture on AI at AMU; discussion on the role of AI in media, libraries, and education.

 

अलीगढ़।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तेजी से दुनिया भर में शिक्षा, मीडिया, शोध और सूचना प्रबंधन के तौर-तरीकों को बदल रहा है। इसके बढ़ते प्रभाव, नई संभावनाओं और चुनौतियों को लेकर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग में एक विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। इसमें अमेरिका की शिकागो स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एमेरिटस गेब्रियल गोमेज ने एआई के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।

प्रोफेसर गोमेज शिकागो स्टेट यूनिवर्सिटी के कंप्यूटिंग, सूचना, गणितीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग से जुड़े रहे हैं। उन्होंने ‘एआई, मीडिया और लाइब्रेरी: अमेरिका से एक उत्कृष्ट तकनीकी योगदान की पड़ताल’ विषय पर व्याख्यान दिया।

शिक्षा, मीडिया और शोध में एआई की बढ़ती भूमिका

अपने संबोधन में प्रोफेसर गोमेज ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस किस तरह सूचना तक पहुंच को आसान बनाने और शैक्षणिक गतिविधियों को नई दिशा देने की क्षमता रखता है।

उन्होंने सोशल लिसनिंग, शिक्षण, अध्ययन और शोध में एआई के उपयोग पर चर्चा की। सोशल लिसनिंग ऐसी प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर होने वाली चर्चाओं, लोगों की प्रतिक्रियाओं और उभरते रुझानों का विश्लेषण किया जाता है।

व्याख्यान में इस बात पर भी चर्चा हुई कि एआई तकनीक पुस्तकालयों में सूचना प्रबंधन, शोध सामग्री की खोज और ज्ञान संसाधनों तक पहुंच को किस तरह प्रभावित कर सकती है।

एआई के खतरों और पर्यावरणीय प्रभावों पर भी चिंता

प्रोफेसर गोमेज ने एआई की संभावनाओं के साथ उससे जुड़ी चुनौतियों को भी रेखांकित किया। उन्होंने विशेष रूप से ‘रोग एआई’ यानी ऐसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता तंत्रों से जुड़े जोखिमों पर चर्चा की, जो अपेक्षित नियंत्रण या निर्धारित उद्देश्यों से हटकर व्यवहार कर सकते हैं।

इसके अलावा, उन्होंने एआई तकनीक को संचालित करने वाले विशाल डेटा सेंटरों के पर्यावरणीय प्रभावों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया।उन्होंने बताया कि डेटा सेंटरों के संचालन के लिए बड़ी मात्रा में जमीन, बिजली और पानी की आवश्यकता होती है। ऐसे में एआई के बढ़ते उपयोग के साथ संसाधनों की खपत और पर्यावरणीय स्थिरता जैसे सवाल भी महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं।

क्या भविष्य में एआई इंसानी बुद्धिमत्ता से आगे निकल जाएगा?

व्याख्यान के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भविष्य और उसके सुपरइंटेलिजेंस के रूप में विकसित होने की संभावना पर भी विचार-विमर्श हुआ।सुपरइंटेलिजेंस से आशय ऐसी संभावित कृत्रिम बुद्धिमत्ता से है, जिसकी क्षमताएं अनेक बौद्धिक क्षेत्रों में मानव बुद्धिमत्ता से आगे निकल सकती हैं।

इस संदर्भ में एआई के सामाजिक प्रभावों और भविष्य में मानव समाज के सामने आने वाली संभावित चुनौतियों पर चर्चा की गई।

छात्रों को नई तकनीक समझने का मिला अवसर

इस कार्यक्रम का समन्वय प्रोफेसर एम. मासूम रजा ने विभागाध्यक्ष प्रोफेसर मेहताब आलम अंसारी के सहयोग से किया।व्याख्यान के माध्यम से छात्रों को पुस्तकालय विज्ञान, मीडिया और शिक्षा के क्षेत्र में एआई की उभरती संभावनाओं तथा उससे जुड़ी जटिल चुनौतियों को समझने का अवसर मिला।

कार्यक्रम ने यह महत्वपूर्ण सवाल भी सामने रखा कि तेजी से विकसित होती कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग ज्ञान और सूचना तक पहुंच को बेहतर बनाने के साथ जिम्मेदारीपूर्ण और टिकाऊ तरीके से कैसे किया जा सकता है।एएमयू में आयोजित यह व्याख्यान आधुनिक तकनीक, शिक्षा और समाज के बदलते संबंधों को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अकादमिक पहल रहा।