जामिया छात्र संघ चुनाव की तारीख तय हो : सलीम इंजीनियर

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 27-10-2026
Set a date for the Jamia student union elections and withdraw all disciplinary actions: Salim Engineer
Set a date for the Jamia student union elections and withdraw all disciplinary actions: Salim Engineer

 

नई दिल्ली।

जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष प्रो. सलीम इंजीनियर ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव कराने के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय करने की मांग की है। उन्होंने छात्र आंदोलन के दौरान विद्यार्थियों के खिलाफ की गई सभी अनुशासनात्मक कार्रवाइयों को बिना किसी शर्त के तत्काल वापस लेने की भी अपील की है।

मीडिया को जारी बयान में प्रो. सलीम इंजीनियर ने कहा कि छात्र संघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराने का कथित निर्णय सकारात्मक कदम है। हालांकि, इसके साथ चुनाव की अधिसूचना जारी करने, संविधान का मसौदा तैयार करने और चुनाव की तारीख घोषित करने के लिए निश्चित समय-सीमा भी तय होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि स्पष्ट समय-सीमा के अभाव में संविधान तैयार करने की प्रक्रिया अनिश्चित बनी रह सकती है। इससे जामिया मिल्लिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन (JMISU) की बहाली की छात्रों की मुख्य मांग अधूरी रह जाएगी।

प्रो. इंजीनियर के मुताबिक, छात्रों ने अपना विरोध प्रदर्शन वापस नहीं लिया है। ऐसे में उनकी लंबित मांगों और चिंताओं का समाधान सार्थक बातचीत तथा स्पष्ट आश्वासनों के जरिए किया जाना जरूरी है।

छात्रों पर कार्रवाई पूरी तरह वापस लेने की मांग

जमाअत के उपाध्यक्ष ने निलंबन आदेशों और कारण बताओ नोटिसों को रद्द किए जाने की खबर का स्वागत किया। साथ ही उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आंदोलन के सिलसिले में छात्रों के खिलाफ की गई सभी अनुशासनात्मक कार्रवाइयां पूरी तरह और बिना शर्त वापस ली जाएं।

उन्होंने मांग की कि विश्वविद्यालय प्रशासन लिखित आश्वासन दे कि विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के कारण छात्रों के खिलाफ आगे कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

प्रो. सलीम इंजीनियर ने कहा कि ऐसा आश्वासन छात्रों और प्रशासन के बीच विश्वास बहाल करने में मददगार होगा। उन्होंने विश्वविद्यालय से तय समय-सीमा के भीतर संवैधानिक औपचारिकताएं पूरी करने और बिना किसी अतिरिक्त देरी के चुनाव कार्यक्रम घोषित करने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया का अंतिम परिणाम छात्र संघ चुनाव होना चाहिए। मामला केवल समिति गठित करने या उसके स्तर पर विचार विमर्श तक सीमित नहीं रहना चाहिए।

सुरक्षाकर्मियों के आचरण की निष्पक्ष जांच हो

प्रो. सलीम इंजीनियर ने छात्र विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षाकर्मियों के कथित आचरण की विश्वसनीय और निष्पक्ष जांच की मांग भी की।

उन्होंने विशेष रूप से 17 अक्टूबर की तड़के हुई घटना का उल्लेख किया। इस दौरान भूख हड़ताल कर रहे छात्रों को प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोशिश किए जाने के आरोपों की गंभीरता से जांच करने की मांग की गई।

उन्होंने कहा कि जवाबदेही तय करते समय किसी के पद या हैसियत को आड़े नहीं आने देना चाहिए। अनुशासनात्मक आदेश वापस लेने और जांच शुरू करने जैसे कदम स्वागत योग्य हैं, लेकिन जनता का भरोसा इस बात पर निर्भर करेगा कि इन फैसलों को कितनी पारदर्शिता और निष्पक्षता से लागू किया जाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि जब किसी विरोध प्रदर्शन में सामूहिक भागीदारी के कारण छात्रों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई हो, तो राहत पाने के लिए प्रत्येक छात्र को अलग-अलग प्रयास करने की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए।

लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व का अवसर मिले

जामिया में छात्र विरोध प्रदर्शन और छात्र संघ की बहाली के मुद्दे पर अपनी चिंता दोहराते हुए प्रो. सलीम इंजीनियर ने कहा कि विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी केवल शिक्षा देने तक सीमित नहीं है। उन्हें लोकतांत्रिक भागीदारी, आलोचनात्मक सोच और जिम्मेदार नेतृत्व को भी बढ़ावा देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया की प्रतिष्ठित शैक्षणिक विरासत को देखते हुए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि छात्रों को लागू नियमों और व्यवस्था के तहत लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व का उचित अवसर मिले। इसमें लिंगदोह समिति की संबंधित सिफारिशों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

प्रो. सलीम इंजीनियर ने विश्वविद्यालय प्रशासन से आग्रह किया कि वह अपने आश्वासनों को ठोस और समयबद्ध कार्रवाई में बदले। साथ ही विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षाकर्मियों के कथित आचरण के मामले में जवाबदेही सुनिश्चित करे।

उन्होंने कहा कि छात्रों की चिंताओं का निष्पक्ष और पारदर्शी समाधान विश्वविद्यालय में विश्वास बहाल करने, शैक्षणिक माहौल की रक्षा करने और लोकतांत्रिक संस्कृति को मजबूत बनाने में मदद करेगा।

जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष की इन मांगों के केंद्र में छात्र संघ चुनाव की समय-सीमा, अनुशासनात्मक कार्रवाई की वापसी, विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित घटनाओं की जांच और परिसर में लोकतांत्रिक भागीदारी सुनिश्चित करने के मुद्दे हैं।