एएमयू की दिव्या वार्ष्णेय और हामिद खान को अंतरराष्ट्रीय सम्मान

Story by  मलिक असगर हाशमी | Published by  [email protected] | Date 16-10-2026
AMU’s Divya Varshney and Hamid Khan receive international recognition
AMU’s Divya Varshney and Hamid Khan receive international recognition

 

आवाज द वाॅयस /अलीगढ़

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी यानी एएमयू के छात्रों का डंका इन दिनों पूरी दुनिया में बज रहा है। यूनिवर्सिटी के युवा शोधकर्ताओं ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए देश और संस्थान का नाम रोशन किया है। ताजा मामला मलेशिया और तुर्की के इस्तांबुल से जुड़ा है, जहां एएमयू के दो अलग-अलग छात्रों ने अपनी बेहतरीन रिसर्च के दम पर प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार अपने नाम किए हैं। इस शानदार कामयाबी से पूरे अलीगढ़ परिसर में जश्न का माहौल है और हर कोई इन युवाओं की पीठ थपथपा रहा है।

dमलेशिया में चमकी एएमयू की रिसर्च स्कॉलर दिव्या वार्ष्णेय

सबसे पहले बात करते हैं कृषि माइक्रोबायोलॉजी विभाग की प्रतिभावान रिसर्च स्कॉलर दिव्या वार्ष्णेय की। दिव्या ने हाल ही में मलेशिया के मणिपाल यूनिवर्सिटी कॉलेज में आयोजित एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया था। यह सम्मेलन 'क्लिनिकल, हेल्थ, इंजीनियरिंग एंड मेडिकल साइंसेज' जैसे गंभीर विषयों पर केंद्रित था। इस प्रतिष्ठित मंच पर दिव्या वार्ष्णेय ने अपनी उत्कृष्ट शोध प्रस्तुति के लिए 'बेस्ट ओरल प्रेजेंटेशन अवार्ड' अपने नाम किया।

उनकी इस रिसर्च का विषय बेहद अनूठा और स्वास्थ्य जगत के लिए बेहद महत्वपूर्ण था। उनके शोध का शीर्षक था कि कैसे स्टैफिलोकोकस ऑरियस और कैंडिडा एल्बिकन्स जैसे खतरनाक सूक्ष्मजीवों के खिलाफ नैनोटेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा सकता है।

उन्होंने मोनार्डा एसेंशियल ऑयल वाले काइटोसन नैनोपार्टिकल्स की एंटीमाइक्रोबियल और एंटीबायोफिल्म क्षमता पर विस्तार से प्रकाश डाला। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में बायोफिल्म से जुड़े ओरल इन्फेक्शन और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस यानी दवाओं के बेअसर होने की समस्या एक बहुत बड़ी चुनौती बनती जा रही है। दिव्या का यह अध्ययन इस गंभीर समस्या से निपटने में एक नई उम्मीद की किरण बनकर सामने आया है।

इस पूरी रिसर्च को एग्रीकल्चरल माइक्रोबायोलॉजी विभाग के अनुभवी प्रोफेसर इकबाल अहमद के मार्गदर्शन में पूरा किया गया था। इस बड़ी सफलता पर कृषि विज्ञान संकाय के डीन प्रोफेसर आरयू खान और विभाग के चेयरमैन प्रोफेसर शम्स तबरेज खान ने भी दिव्या को बधाई दी है। सभी ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें ऐसे ही ग्लोबल मंचों पर आगे भी देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए प्रेरित किया।

fइस्तांबुल में हामिद हुसैन खान ने लहराया सफलता का परचम

मलेशिया के बाद अब रुख करते हैं तुर्की के ऐतिहासिक शहर इस्तांबुल का, जहां एएमयू के एक अन्य छात्र ने अपनी काबिलियत का डंका बजाया है। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के कंप्यूटर साइंस विभाग में एमएससी साइबर सिक्योरिटी एंड डिजिटल फोरेंसिक के छात्र हामिद हुसैन खान ने इस्तांबुल में आयोजित चौथे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बड़ी सफलता हासिल की है। यह कॉन्फ्रेंस 'इनोवेटिव कंप्यूटिंग एंड कटिंग-एज टेक्नोलॉजीज' यानी आईसीआईसीटी पर आधारित थी, जिसमें दुनिया भर के दिग्गज शोधकर्ताओं ने हिस्सा लिया।

हामिद हुसैन खान को यह प्रतिष्ठित 'बेस्ट प्रेजेंटेशन अवार्ड' उनके शोध पत्र 'ऑडिटिंग ऑटोमैटिक स्पीच रिकग्निशन सिस्टम्स फॉर लो-रिसोर्स उर्दू लैंग्वेज' के लिए मिला। इस महत्वपूर्ण शोध को उन्होंने कंप्यूटर साइंस विभाग के प्रोफेसर आसिम ज़फ़र के साथ मिलकर तैयार किया था।

इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की सबसे खास बात यह रही कि हामिद ने केवल एक शोध प्रस्तुतकर्ता के रूप में ही हिस्सा नहीं लिया, बल्कि उन्होंने एक मॉडरेटर की भूमिका भी बखूबी निभाई। उन्होंने कई महत्वपूर्ण शैक्षणिक सत्रों का संचालन किया, जिससे ग्लोबल रिसर्च कम्युनिटी के साथ उनका संपर्क और दायरा दोनों मजबूत हुए।

एएमयू की वैश्विक साख और शिक्षा का स्तर

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी हमेशा से ही अपनी उच्च शिक्षा और गंभीर शोध कार्यों के लिए दुनिया भर में जानी जाती है। मलेशिया और इस्तांबुल में मिले ये दोनों अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार इस बात का पुख्ता प्रमाण हैं कि एएमयू के छात्र अब केवलता किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे वैश्विक समस्याओं के व्यावहारिक समाधान ढूंढ रहे हैं। नैनोटेक्नोलॉजी से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और लैंग्वेज स्पीच रिकग्निशन तक, हमारे युवा हर अत्याधुनिक क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सफलताएं आने वाली पीढ़ी के छात्रों को विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं। जब किसी छोटे या बड़े शहर से निकलकर कोई युवा अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने काम का लोहा मनवाता है, तो वह पूरे देश के युवाओं के लिए एक मिसाल बन जाता है। एएमयू प्रशासन ने भी इन दोनों विद्यार्थियों की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर गर्व महसूस किया है और आने वाले दिनों में शोध कार्यों को और अधिक बढ़ावा देने का संकल्प लिया है।