Prof. Ghaznafar Ali shared the art of writing a good story.
हैदराबाद
Maulana Azad National Urdu University के उर्दू विभाग में ‘तख़लीक़कार से मुलाकात’ शीर्षक से एक विशेष साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध कथाकार और साहित्यकार Prof. Ghazanfar Ali ने मुख्य वक्ता के रूप में भाग लिया और “कहानी कैसे लिखें” विषय पर विस्तार से अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी और छात्र उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में प्रोफेसर ग़ज़नफ़र अली ने कहा कि एक अच्छी कहानी लिखना केवल शब्दों का खेल नहीं, बल्कि गहरी संवेदनशीलता, अनुभव और कल्पनाशक्ति का परिणाम होता है। उन्होंने कहानी लेखन के चार मूल तत्वों पर विशेष बल दिया — ‘कुव्वत-ए-एहसास’ यानी संवेदना की शक्ति, ‘कुव्वत-ए-मुमय्यज़ा’ यानी सही और गलत में अंतर करने की क्षमता, ‘कुव्वत-ए-ज़बान’ यानी भाषा पर पकड़ और ‘कुव्वत-ए-मुतख़य्यला’ यानी कल्पनाशक्ति।
उन्होंने कहा कि किसी भी रचनाकार के भीतर ये चारों गुण जितनी अधिक मात्रा में मौजूद होंगे और वह उन्हें अभिव्यक्त करने की कला में जितना अधिक दक्ष होगा, वह उतना ही बेहतर साहित्यकार बन सकता है। प्रो. ग़ज़नफ़र के अनुसार, लेखन की यह क्षमता अचानक विकसित नहीं होती, बल्कि लगातार अभ्यास, अध्ययन, अनुभव और गहन अवलोकन से परिपक्व होती है।
उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि अच्छी कहानियां लिखने के लिए महान साहित्यकारों की रचनाओं का गंभीर अध्ययन करना बेहद आवश्यक है। केवल लिखने की इच्छा पर्याप्त नहीं होती, बल्कि समाज, इंसानी भावनाओं और जीवन के विभिन्न अनुभवों को समझना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि लेखक को अपने आसपास की दुनिया का सूक्ष्म निरीक्षण करना चाहिए, क्योंकि वास्तविक जीवन ही साहित्य का सबसे बड़ा स्रोत होता है।
प्रोफेसर ग़ज़नफ़र अली ने यह भी कहा कि किसी कहानी में भाषा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यदि लेखक की भाषा प्रभावशाली और जीवंत होगी, तो पाठक कहानी से भावनात्मक रूप से जुड़ पाएगा। साथ ही उन्होंने कल्पनाशक्ति को साहित्य की आत्मा बताते हुए कहा कि रचनाकार की कल्पना ही साधारण घटनाओं को असाधारण साहित्य में बदल देती है।
कार्यक्रम के अंत में छात्रों और शिक्षकों ने कहानी लेखन तथा साहित्य से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे। प्रोफेसर ग़ज़नफ़र अली ने सभी सवालों के विस्तार से उत्तर दिए और छात्रों को नियमित लेखन तथा गंभीर अध्ययन की सलाह दी। उन्होंने युवा लेखकों को यह संदेश भी दिया कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को समझने और बदलने की शक्ति भी रखता है।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग के शिक्षक, शोध छात्र और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन और आयोजन विभाग की ओर से किया गया। अंत में प्रतिभागियों ने इस साहित्यिक संवाद को प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक बताया।
यह जानकारी डॉ. मोहम्मद मुस्तफा अली सरवरी द्वारा जारी प्रेस नोट में दी गई।