सना
यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने दावा किया है कि उसकी सेना ने ‘डॉन ऑफ यमन’ सैन्य अभियान के तहत विभिन्न मोर्चों पर ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ 1,879 सैन्य अभियान चलाए। इन अभियानों में 950 हूती लड़ाकों के मारे जाने का दावा किया गया है।
यमन सरकार के सैन्य प्रवक्ता कर्नल माजिद अल-नुजैली के अनुसार, इन अभियानों के दौरान 380 सैन्य वाहनों को नष्ट या निष्क्रिय कर दिया गया। उन्होंने बताया कि सेना ने हूती विद्रोहियों के ठिकानों, कमांड सेंटरों, हथियारों के गोदामों और अन्य सैन्य संसाधनों को निशाना बनाया।
सरकारी बलों ने यह अभियान हूती विद्रोहियों के कब्जे वाले क्षेत्रों को दोबारा अपने नियंत्रण में लेने के उद्देश्य से शुरू किया है। इनमें राजधानी सना भी शामिल है, जो लंबे समय से हूती विद्रोहियों के नियंत्रण में है।
हालांकि, इन सैन्य अभियानों और हताहतों की संख्या से जुड़े दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। हूती विद्रोहियों की ओर से भी तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
इस बीच, रेड क्रॉस ने मंगलवार को मध्य पूर्व में जारी संघर्ष को तत्काल कम करने की अपील की। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि क्षेत्र में लड़ाई और तेज होती है, तो इसके परिणाम करोड़ों आम नागरिकों के लिए विनाशकारी हो सकते हैं।
यमन में गृहयुद्ध लंबे समय से जारी है। इस संघर्ष में सऊदी अरब के नेतृत्व वाला सैन्य गठबंधन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार का समर्थन करता रहा है, जबकि हूती विद्रोहियों को ईरान का समर्थन प्राप्त है।
क्षेत्र में व्यापक संघर्ष के कई महीनों बाद जुलाई में यमन का गृहयुद्ध फिर से तेज हो गया। मध्य पूर्व में जारी इस व्यापक संकट ने ऊर्जा बाजारों को भी प्रभावित किया है और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति (आईसीआरसी) की अध्यक्ष मिर्जाना स्पोलजारिक ने नागरिकों पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर गंभीर चिंता जताई।
उन्होंने कहा, “मध्य पूर्व में सैन्य अभियानों के कारण आम नागरिकों को जिस कीमत का भुगतान करना पड़ रहा है, वह अस्वीकार्य है।”
रेड क्रॉस की यह अपील ऐसे समय में आई है, जब मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव और लगातार जारी संघर्ष के कारण आम लोगों की सुरक्षा, मानवीय सहायता और क्षेत्रीय शांति को लेकर चिंताएं गहराती जा रही हैं।