Western European countries are divided over Trump's 'Board of Peace' for Gaza.
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
गाजा के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शांति योजना में परिकल्पित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को लेकर बुधवार को मतभेद देखने को मिले। इसमें कुछ पश्चिमी यूरोपीय देशों ने शामिल होने से इनकार कर दिया, जबकि अन्य ने कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई।
इस घटनाक्रम ने विवादास्पद और महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर यूरोपीय देशों की चिंताओं को रेखांकित किया है। इस बारे में कुछ लोगों का कहना है कि यह वैश्विक संघर्षों में मध्यस्थ के रूप में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को प्रतिस्थापित करने का प्रयास है।
ट्रंप विश्व आर्थिक मंच की बैठक में शामिल होने के लिए स्विट्जरलैंड के दावोस पहुंचे हैं, जहां उनसे बोर्ड के लिए अपने दृष्टिकोण के बारे में अधिक विवरण प्रदान करने की उम्मीद की जा रही है।
व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने बताया कि बोर्ड में करीब 30 देशों के शामिल होने की उम्मीद है, लेकिन उन्होंने इस बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी।
अधिकारी ने आंतरिक योजनाओं का विवरण देते हुए कहा कि लगभग 50 देशों को संगठन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है।
नॉर्वे और स्वीडन ने बुधवार को कहा कि वे आमंत्रण स्वीकार नहीं करेंगे। इससे पहले, फ्रांस ने भी मना करते हुए इस बात पर जोर दिया था कि हालांकि वह गाजा शांति योजना का समर्थन करता है, लेकिन उसे चिंता है कि बोर्ड संघर्षों के समाधान के मुख्य मंच के रूप में संयुक्त राष्ट्र की जगह लेने का प्रयास कर सकता है।