संयुक्त राष्ट्र।
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा अमेरिका को कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और संयुक्त राष्ट्र निकायों से हटाने के फैसले पर गहरी चिंता व्यक्त की है। गुतारेस ने कहा कि इस स्थिति के बावजूद वैश्विक संगठन अपनी जिम्मेदारियों को दृढ़ संकल्प के साथ निभाना जारी रखेंगे।
राष्ट्रपति ट्रंप ने बुधवार को अमेरिका को 60 से अधिक अंतरराष्ट्रीय संगठनों से हटाने की घोषणा की, जिसमें 31 संयुक्त राष्ट्र निकाय और भारत-फ्रांस के नेतृत्व वाला अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन भी शामिल हैं। ट्रंप ने इन संस्थानों को “अनावश्यक” और अमेरिका के हितों के “विपरीत” बताया।
संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा, "संयुक्त राष्ट्र के कई संस्थानों से अमेरिका के हटने के संबंध में व्हाइट हाउस द्वारा की गई घोषणा पर महासचिव मायूस हैं।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र का यह दायित्व है कि वह उन लोगों के लिए कार्य करता रहे जो संगठन पर निर्भर हैं।
गुतारेस ने कहा, "हम दृढ़ संकल्प के साथ अपने दायित्वों को पूरा करना जारी रखेंगे।" उन्होंने यह भी याद दिलाया कि संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अनुमोदित नियमित बजट और शांतिरक्षा बजट में सदस्य देशों का योगदान, जिसमें अमेरिका भी शामिल है, संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत कानूनी दायित्व है।
इस बीच, संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज़ ने मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि अमेरिका अब उन अंतरराष्ट्रीय संगठनों में हिस्सा नहीं लेगा और उन्हें वित्त पोषित नहीं करेगा जो अमेरिकी हितों की पूर्ति नहीं करते या उनके विपरीत कार्य करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय सहयोग और वैश्विक कूटनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव की ओर संकेत करता है। हालांकि गुतारेस और संयुक्त राष्ट्र ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के निर्णय के बावजूद संगठन अपनी जिम्मेदारियों और मानवीय दायित्वों को निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस फैसले का प्रभाव न केवल संयुक्त राष्ट्र निकायों पर पड़ेगा बल्कि वैश्विक नीति और अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं के वित्त पोषण और संचालन पर भी महत्वपूर्ण असर डाल सकता है।