ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर कब्जे की जरूरत बताई, रूस और चीन को बताया बड़ा खतरा

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 10-01-2026
Trump stated the need to acquire Greenland and described Russia and China as major threats.
Trump stated the need to acquire Greenland and described Russia and China as major threats.

 

न्यूयॉर्क

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ग्रीनलैंड को लेकर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि रूस और चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए ग्रीनलैंड का अधिग्रहण करना आवश्यक है। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि इस मामले में ग्रीनलैंड के लोगों की सहमति या असहमति उनके लिए निर्णायक नहीं है।

बुधवार को व्हाइट हाउस में अमेरिकी तेल कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा, “ग्रीनलैंड के लोग चाहें या न चाहें, हमें इस दिशा में कदम उठाना होगा। अगर अमेरिका ऐसा नहीं करता है, तो चीन या रूस वहां अपना प्रभाव जमा लेंगे। हम नहीं चाहते कि हमारे पड़ोस में रूस या चीन जैसे देश हों।”

ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका किसी भी हालत में ग्रीनलैंड पर अपना नियंत्रण स्थापित करेगा। उन्होंने 1951 की संधि का हवाला देते हुए बताया कि अमेरिका का पहले से ही ग्रीनलैंड में एक सैन्य अड्डा मौजूद है, लेकिन केवल सैन्य समझौते से सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती। ट्रंप के अनुसार, “सिर्फ संधि से सुरक्षा की गारंटी नहीं मिलती। आपको स्वामित्व की रक्षा करनी होती है, पट्टे की रक्षा करनी होती है और ग्रीनलैंड को हमारी सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाना होता है। अगर हम ऐसा नहीं करेंगे, तो चीन या रूस यह करेंगे।”

गौरतलब है कि ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है, जिसका क्षेत्रफल लगभग 21.66 लाख वर्ग किलोमीटर है। हालांकि इतना विशाल होने के बावजूद यहां की आबादी बहुत कम है—करीब 56 से 57 हजार लोग। इनमें से लगभग 90 प्रतिशत लोग इनुइट जातीय समुदाय से आते हैं। भौगोलिक रूप से ग्रीनलैंड उत्तरी अमेरिका में स्थित है, लेकिन राजनीतिक रूप से यह डेनमार्क के अधीन एक स्वायत्त क्षेत्र है। यहां के नागरिक डेनमार्क और यूरोपीय संघ दोनों के नागरिक माने जाते हैं।

ट्रंप ने 20 जनवरी 2025 को दोबारा अमेरिकी राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद से ही ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने की बात दोहराई है। हालांकि ग्रीनलैंड और डेनमार्क दोनों ने इस विचार का लगातार कड़ा विरोध किया है और साफ किया है कि यह क्षेत्र बिक्री के लिए नहीं है।

ग्रीनलैंड मुद्दे पर यूरोपीय देशों ने भी एकजुट होकर प्रतिक्रिया दी है। मंगलवार को जारी एक संयुक्त बयान में फ्रांस, जर्मनी, इटली, पोलैंड, स्पेन, ब्रिटेन और डेनमार्क ने कहा कि ग्रीनलैंड के भविष्य से जुड़े किसी भी फैसले का अधिकार केवल ग्रीनलैंड और डेनमार्क को है।

ट्रंप के इस बयान से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि यह बयान संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करता है।