आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 15 प्रतिशत के एकसमान शुल्क का एशिया-प्रशांत क्षेत्र की कुछ अर्थव्यवस्थाओं को लाभ मिल सकता है जिन्हें पहले अधिक ऊंचे शुल्क का सामना करना पड़ा है। इनमें चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया के अधिकतर देश शामिल हैं।
मूडीज एनालिटिक्स ने मंगलवार को बयान में कहा कि जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान (चीन) जैसे देशों पर इसका प्रभाव हालांकि सीमित होगा जहां शुल्क पहले से ही 15 प्रतिशत है।
बयान में कहा गया है, ‘‘ काफी अनिश्चितता है, लेकिन हम कुछ बातें जानते हैं। 15 प्रतिशत का समान शुल्क उन एशिया-प्रशांत अर्थव्यवस्थाओं को लाभ पहुंचाएगा, जिन्हें कहीं अधिक शुल्क का सामना करना पड़ा है।’’
अमेरिकी उच्चतम न्यायालय ने पिछले सप्ताह ट्रंप प्रशासन के देश-विशिष्ट शुल्क के खिलाफ फैसला दिया था, जिसके बाद ट्रंप ने सभी देशों पर 150 दिन के लिए 10 प्रतिशत शुल्क लगा दिया। बाद में इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने की भी घोषणा की है। हालांकि, इस संबंध में अब तक कोई आदेश या अधिसूचना जारी नहीं की गई है।
बयान में कहा गया है, ‘‘ अदालत का फैसला भारत और इंडोनेशिया के साथ हाल ही में हुए व्यापार समझौतों पर भी सवाल उठाता है। प्रमुख विवरण, जैसे कि भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद धीरे-धीरे कम करने की समयसीमा और इंडोनेशिया से शुल्क-मुक्त वस्त्र निर्यात की मात्रा, अभी तय नहीं हुए हैं। भारत ने अपने प्रतिनिधिमंडल को वॉशिंगटन भेजने की योजना भी टाल दी है।’’
इसमें कहा गया कि अदालत के फैसले से अमेरिका की देश-विशिष्ट शुल्क लगाने की शक्ति सीमित होती है, जिससे व्यापार वार्ताओं में उसका दबाव कम होता है। इसमें एक महीने से कुछ अधिक समय में ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच होने वाली महत्वपूर्ण बैठक जैसी उच्च-स्तरीय बातचीत भी शामिल है।