वॉशिंगटन
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने सोमवार को वैश्विक व्यापार पर सख्त रुख अपनाते हुए संकेत दिया कि उनकी सरकार अंतरराष्ट्रीय शुल्क (टैरिफ) को बढ़ाकर 15 प्रतिशत तक कर सकती है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका के उच्चतम न्यायालय के एक फैसले को लेकर टैरिफ नीति पर बहस तेज हो गई है।
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद अन्य देशों को अमेरिका के साथ हुए शुल्क समझौतों का पूरी तरह पालन करना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि कोई भी देश यदि अदालत के फैसले का हवाला देकर टैरिफ समझौतों से पीछे हटने की कोशिश करता है, तो उसे पहले से तय दरों से भी अधिक शुल्क का सामना करना पड़ेगा।
राष्ट्रपति ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कड़े शब्दों में कहा कि जिन देशों ने वर्षों या दशकों तक अमेरिका के साथ व्यापार में असंतुलन पैदा किया है, वे अब किसी भी तरह की रियायत की उम्मीद न करें। उनके अनुसार, अमेरिका अब “अनुचित व्यापार व्यवहार” को बर्दाश्त नहीं करेगा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद प्रशासन ने 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ की घोषणा की थी। हालांकि, ट्रंप के ताजा बयान से संकेत मिलता है कि यह दर बढ़ाकर 15 प्रतिशत तक की जा सकती है। यदि ऐसा होता है तो यह कदम वैश्विक बाजारों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि टैरिफ बढ़ोतरी से आयात महंगा हो सकता है, जिससे उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में इजाफा संभव है। वहीं, प्रशासन का तर्क है कि उच्च शुल्क से घरेलू उद्योगों को मजबूती मिलेगी और अमेरिका में विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा।
ट्रंप का यह रुख आगामी महीनों में वैश्विक व्यापार वार्ताओं को और अधिक जटिल बना सकता है। कई देश पहले ही अमेरिकी टैरिफ नीतियों को लेकर चिंता जता चुके हैं। ऐसे में 15 प्रतिशत तक शुल्क बढ़ाने की संभावित घोषणा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई आर्थिक बहस को जन्म दे सकती है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या अमेरिकी प्रशासन औपचारिक रूप से टैरिफ बढ़ोतरी की घोषणा करता है और इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ता है।





