वॉशिंगटन
अमेरिका की सेना ने पूर्वी प्रशांत महासागर में कथित तौर पर मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल एक नाव पर फिर से घातक हमला किया है। अमेरिकी दक्षिणी कमान United States Southern Command ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि यह नाव “पूर्वी प्रशांत में ज्ञात नार्को-तस्करी मार्गों पर संचालित हो रही थी और ड्रग तस्करी गतिविधियों में संलिप्त थी।” इस हमले में तीन लोगों की मौत हो गई। साझा किए गए वीडियो में नाव को पानी में तैरते हुए और फिर आग की लपटों में घिरते देखा गया।
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब Donald Trump प्रशासन पहले से ही लैटिन अमेरिका के कथित ड्रग कार्टेल्स के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए है। सितंबर की शुरुआत से अब तक कैरेबियाई सागर और पूर्वी प्रशांत क्षेत्र में कम से कम 43 हमलों में 148 लोगों की मौत हो चुकी है। ट्रंप ने इन अभियानों को “सशस्त्र संघर्ष” का हिस्सा बताते हुए कहा है कि अमेरिका ड्रग कार्टेल्स के खिलाफ युद्ध जैसी स्थिति में है और यह कार्रवाई मादक पदार्थों के प्रवाह को रोकने के लिए जरूरी है।
हालांकि प्रशासन ने इन हमलों में मारे गए लोगों को “नार्को-टेररिस्ट” बताया है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि इसके समर्थन में ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। कानूनी विशेषज्ञों और कुछ सांसदों ने इन हमलों की वैधता और प्रभावशीलता दोनों पर सवाल उठाए हैं। उनका तर्क है कि अमेरिका में घातक ओवरडोज के लिए जिम्मेदार फेंटानिल जैसे ड्रग्स आमतौर पर मेक्सिको से जमीनी रास्ते से पहुंचते हैं, जहां उनका उत्पादन चीन और भारत से आयातित रसायनों से किया जाता है।
नावों पर हमले को लेकर विवाद तब और गहरा गया जब खुलासा हुआ कि पहले हमले के बाद बचे लोगों पर भी दोबारा कार्रवाई की गई थी। ट्रंप प्रशासन और कई रिपब्लिकन सांसदों ने इसे कानूनी और आवश्यक बताया, जबकि डेमोक्रेटिक नेताओं और अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों ने इसे संभावित रूप से गैरकानूनी, यहां तक कि युद्ध अपराध करार दिया।
पूर्वी प्रशांत में ताजा कार्रवाई ने एक बार फिर अमेरिकी ड्रग-रोधी रणनीति, अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों को लेकर बहस को तेज कर दिया है।





