वाशिंगटन
अमेरिका द्वारा मादक पदार्थों की कथित तस्करी में शामिल नौकाओं पर किए गए सैन्य हमलों में अब तक 126 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। अमेरिकी सेना ने सोमवार को यह जानकारी सार्वजनिक की। यह कार्रवाई कैरेबियाई सागर और पूर्वी प्रशांत महासागर में की गई, जहां अमेरिका लंबे समय से ड्रग्स की तस्करी पर रोक लगाने के लिए सैन्य अभियान चला रहा है।
अमेरिकी यूएस सदर्न कमांड (SOUTHCOM) के अनुसार, सितंबर की शुरुआत से अब तक कम से कम 36 हमले किए गए हैं। इनमें से 116 लोग हमलों के दौरान मौके पर ही मारे गए, जबकि हमलों के बाद लापता हुए 10 लोगों को मृत मान लिया गया है। सेना का कहना है कि समुद्र में लापता हुए लोगों के जीवित बचने की संभावना बेहद कम है, इसलिए उन्हें मृतकों की सूची में शामिल किया गया है।
सेना ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि मृत माने गए लोगों में से आठ व्यक्ति उन तीन नौकाओं से कूद गए थे, जिन पर 30 दिसंबर को अमेरिकी बलों ने हमला किया था। इन नौकाओं पर मादक पदार्थों की तस्करी का संदेह था। इसके अलावा, दो अन्य लोग उन नौकाओं पर सवार थे, जिन पर 27 अक्टूबर और पिछले शुक्रवार को हमले किए गए थे।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान अंतरराष्ट्रीय ड्रग कार्टेल्स की समुद्री आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ने के लिए चलाया जा रहा है। अमेरिका का दावा है कि कैरेबियाई और पूर्वी प्रशांत क्षेत्र कोकैन और अन्य मादक पदार्थों की तस्करी के प्रमुख रास्ते बने हुए हैं, जिनका इस्तेमाल लैटिन अमेरिका से अमेरिका और अन्य देशों तक ड्रग्स पहुंचाने के लिए किया जाता है।
इस बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन सैन्य हमलों का बचाव करते हुए कहा है कि अमेरिका लातिन अमेरिका में मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले संगठनों के साथ “सशस्त्र संघर्ष” में है। ट्रंप के मुताबिक, अमेरिका के भीतर ड्रग्स की सप्लाई रोकने के लिए कड़े और निर्णायक कदम उठाना ज़रूरी है।
उन्होंने कहा कि ड्रग तस्करी न केवल अमेरिका की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि इससे संगठित अपराध, हिंसा और नशे की लत जैसी सामाजिक समस्याएं भी बढ़ती हैं। इसी कारण समुद्र में संदिग्ध नौकाओं पर कार्रवाई को उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा कदम बताया।
हालांकि, मानवाधिकार संगठनों की ओर से इस तरह के सैन्य अभियानों में नागरिकों की मौत को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन हमलों से ड्रग तस्करी पर कितना प्रभाव पड़ेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा, लेकिन फिलहाल मृतकों की बढ़ती संख्या ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस अभियान को लेकर बहस को तेज़ कर दिया है।




