नई दिल्ली।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने खाड़ी देशों और जॉर्डन के खिलाफ ईरान द्वारा किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया है। इस प्रस्ताव को परिषद के 13 सदस्यों का समर्थन मिला, जबकि रूस और चीन ने मतदान में भाग नहीं लिया।
यह प्रस्ताव खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) की ओर से बहरीन ने पेश किया था। प्रस्ताव संख्या 2817 में खाड़ी देशों पर ईरान के हमलों की निंदा की गई है और इन हमलों को तुरंत रोकने की मांग की गई है।
प्रस्ताव में कहा गया है कि खाड़ी देशों और जॉर्डन के खिलाफ ईरान द्वारा किए गए मिसाइल और ड्रोन हमले अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन हैं। साथ ही इन्हें अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया गया है। सुरक्षा परिषद ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए तेहरान से अपील की है कि वह पड़ोसी देशों के खिलाफ अपने हमले और उकसावे की कार्रवाइयों को तुरंत और बिना किसी शर्त के बंद करे।
इसके अलावा प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि ईरान को अपने समर्थित समूहों या तथाकथित प्रॉक्सी बलों के माध्यम से क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने वाली गतिविधियों को भी रोकना चाहिए। परिषद ने खाड़ी देशों और जॉर्डन की संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति पूर्ण समर्थन व्यक्त किया है।
संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत इन देशों के आत्मरक्षा के अधिकार की भी पुष्टि की गई है। प्रस्ताव में नागरिकों और महत्वपूर्ण नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की घटनाओं की कड़ी निंदा की गई है और प्रभावित देशों तथा उनके नागरिकों के साथ एकजुटता व्यक्त की गई है।
प्रस्ताव में ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने, समुद्री नौवहन में बाधा डालने या सीधे हस्तक्षेप करने की किसी भी कार्रवाई या धमकी की भी आलोचना की गई है। इसके साथ ही बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा को खतरे में डालने वाली गतिविधियों की भी निंदा की गई है।
दूसरी ओर, सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पारित इस प्रस्ताव का स्वागत किया है। यह प्रस्ताव सऊदी अरब, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, ओमान, कुवैत और जॉर्डन की ओर से प्रस्तुत किया गया था।
सऊदी विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस प्रस्ताव में खाड़ी देशों और जॉर्डन पर ईरान के हमलों की स्पष्ट रूप से निंदा की गई है और यह रेखांकित किया गया है कि ऐसे कदम अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हैं तथा वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं।