दुबई
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति मजबूत करने के लिए लगभग 2,500 मरीन सैनिकों और कम से कम एक युद्धपोत को रवाना करने का निर्णय लिया है। अमेरिकी प्रशासन के इस कदम को क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा जोखिमों और संभावित सैन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
समाचार एजेंसी ‘एसोसिएटेड प्रेस’ को जानकारी देते हुए एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट को पश्चिम एशिया की ओर भेजने का आदेश दिया गया है। यह यूनिट अमेरिकी मरीन कॉर्प्स की एक विशेष और अत्यधिक प्रशिक्षित टुकड़ी है, जिसे संकट की स्थिति में त्वरित कार्रवाई के लिए तैयार रखा जाता है। यह बल आमतौर पर मानवीय सहायता, आपदा राहत, सैन्य अभियान और आपातकालीन स्थितियों में तैनात किया जाता है।
अधिकारी ने यह भी बताया कि इस मिशन के तहत युद्धपोत यूएसएस त्रिपोली को भी क्षेत्र में भेजा जा रहा है। यूएसएस त्रिपोली एक अत्याधुनिक अम्फीबियस असॉल्ट शिप है, जो हेलीकॉप्टरों, उन्नत लड़ाकू विमानों और सैनिकों को साथ लेकर समुद्र से सैन्य अभियान चलाने में सक्षम है। इस युद्धपोत की तैनाती से अमेरिका की समुद्री और सैन्य ताकत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।
हालांकि अधिकारी ने यह जानकारी नाम न छापने की शर्त पर साझा की, लेकिन उन्होंने संकेत दिया कि यह तैनाती पश्चिम एशिया में हाल के दिनों में बढ़े तनाव और सुरक्षा चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए की जा रही है। क्षेत्र में कई देशों के बीच जारी संघर्ष और अस्थिरता ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि 2,500 अतिरिक्त मरीन सैनिकों और युद्धपोत की तैनाती से क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी में काफी वृद्धि होगी। इससे अमेरिका को किसी भी संभावित संकट या संघर्ष की स्थिति में तेजी से प्रतिक्रिया देने की क्षमता मिलेगी।
इस बीच, अमेरिकी रक्षा विभाग ने कहा है कि वह पश्चिम एशिया की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और क्षेत्र में अपने सहयोगियों तथा साझेदार देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाता रहेगा। आने वाले दिनों में स्थिति के अनुसार और भी सैन्य तैनाती या रणनीतिक फैसले लिए जा सकते हैं।