अल-अक्सा मस्जिद बंद करने पर ओआईसी, अरब लीग, अफ्रीकी संघ की निंदा

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 14-03-2026
OIC, Arab League, and African Union Condemn Closure of Al-Aqsa Mosque
OIC, Arab League, and African Union Condemn Closure of Al-Aqsa Mosque

 

दुबई।

इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी), अरब लीग और अफ्रीकी संघ आयोग के महासचिवालयों ने इजराइली कब्जा प्रशासन द्वारा अल-अक्सा मस्जिद को लगातार बंद रखने की कड़ी निंदा की है। तीनों संगठनों ने कहा कि पवित्र शहर अल-कुद्स (यरूशलम) का मुस्लिम समुदाय के लिए विशेष धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है तथा अल-अक्सा मस्जिद के साथ मुसलमानों का गहरा और स्थायी संबंध है।

संयुक्त बयान में कहा गया कि अल-अक्सा मस्जिद मुसलमानों के लिए अत्यंत पवित्र स्थल है। इसे इस्लाम में पहले किबला और तीसरी सबसे पवित्र मस्जिद का दर्जा प्राप्त है। ऐसे में विशेष रूप से रमजान के पवित्र महीने के दौरान मुस्लिम श्रद्धालुओं के लिए मस्जिद के दरवाजे बंद रखना धार्मिक स्वतंत्रता का गंभीर उल्लंघन है।

संगठनों ने कहा कि इजराइली कब्जा प्रशासन का यह कदम अल-कुद्स में स्थित इस्लामी और ईसाई पवित्र स्थलों की ऐतिहासिक और कानूनी स्थिति के खिलाफ है। यह न केवल धार्मिक अधिकारों पर हमला है, बल्कि इससे पूरी दुनिया के मुसलमानों की भावनाएं भी आहत हो रही हैं। साथ ही यह पूजा की स्वतंत्रता और पवित्र स्थलों की गरिमा का भी उल्लंघन है।

बयान में कहा गया कि इजराइल, जो कब्जा करने वाली शक्ति है, इन अवैध और उकसाने वाले कदमों के सभी परिणामों के लिए पूरी तरह जिम्मेदार है। इन कार्रवाइयों के जारी रहने से क्षेत्र में हिंसा और तनाव बढ़ने की आशंका है, जिससे क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय शांति तथा सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।

तीनों संगठनों ने यह भी दोहराया कि 1967 से कब्जे में लिए गए फिलिस्तीनी क्षेत्रों, जिसमें पूर्वी यरूशलम भी शामिल है, पर इजराइल का कोई संप्रभु अधिकार नहीं है। उन्होंने इजराइल द्वारा क्षेत्र की भौगोलिक और जनसांख्यिकीय स्थिति बदलने तथा उसकी अरब, इस्लामी और ईसाई पहचान को प्रभावित करने के सभी प्रयासों को पूरी तरह अवैध और अस्वीकार्य बताया।

बयान में यह भी स्पष्ट किया गया कि अल-अक्सा मस्जिद परिसर, जिसका क्षेत्रफल लगभग 144 दुनम है, पूरी तरह से मुसलमानों के लिए इबादत का स्थान है। किसी भी प्रकार के प्रतिबंध या हस्तक्षेप को अस्वीकार्य बताया गया है।

संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से अपील की कि वह अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए इजराइल पर दबाव बनाए, ताकि अल-अक्सा मस्जिद को तुरंत खोला जाए और फिलिस्तीनी नागरिकों को यरूशलम में स्वतंत्र रूप से आने-जाने और इबादत करने का अधिकार सुनिश्चित किया जा सके।

इसके साथ ही उन्होंने फिलिस्तीनी जनता के अविच्छेद्य अधिकारों के प्रति अपना समर्थन दोहराया और कहा कि 1967 की सीमाओं के आधार पर पूर्वी यरूशलम को राजधानी बनाकर एक स्वतंत्र और संप्रभु फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना ही स्थायी शांति का मार्ग है। उन्होंने दो-राष्ट्र समाधान को लागू करने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का भी समर्थन किया।