वॉशिंगटन
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के साथ संभावित समझौते को लेकर अपना रुख कुछ नरम किया है। रविवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर किए गए एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान के साथ किसी भी समझौते को लेकर जल्दबाजी नहीं करेगा।
हालांकि उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि ईरान पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी तब तक जारी रहेगी, जब तक समझौता पूरी तरह अंतिम रूप लेकर प्रमाणित और हस्ताक्षरित नहीं हो जाता।
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान उनके पिछले दिनों के आक्रामक रुख की तुलना में कहीं अधिक संतुलित और संयमित दिखाई देता है। शनिवार को ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान के साथ समझौता “लगभग अंतिम चरण” में पहुंच चुका है। लेकिन अब उन्होंने कहा है कि बातचीत को पर्याप्त समय दिया जाएगा और किसी तरह की जल्दबाजी नहीं होगी।
अपने पोस्ट में ट्रंप ने सबसे पहले 2015 के परमाणु समझौते की आलोचना की, जो ईरान और छह विश्व शक्तियों के बीच हुआ था। उन्होंने उसे “अमेरिकी इतिहास के सबसे खराब समझौतों में से एक” बताया। ट्रंप ने कहा कि उस समझौते ने ईरान को परमाणु हथियार बनाने का रास्ता दिया था।
उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार जिस नए समझौते पर बातचीत कर रही है, वह पूरी तरह अलग और अधिक सख्त होगा। ट्रंप ने लिखा, “बातचीत व्यवस्थित और रचनात्मक तरीके से आगे बढ़ रही है। मैंने अपने प्रतिनिधियों से कहा है कि जल्दबाजी में कोई समझौता न करें, क्योंकि समय हमारे पक्ष में है।”
ट्रंप ने आगे कहा कि जब तक समझौता पूरी तरह पूरा नहीं हो जाता, तब तक ईरान के खिलाफ नाकाबंदी जारी रहेगी। उन्होंने लिखा, “दोनों पक्षों को इसे सही तरीके से पूरा करने के लिए पर्याप्त समय लेना चाहिए। कोई गलती नहीं होनी चाहिए।”
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच संबंध अब पहले की तुलना में अधिक “पेशेवर और फलदायी” हो रहे हैं। हालांकि इसके साथ ही उन्होंने ईरान को कड़ी चेतावनी भी दी।
ट्रंप ने कहा, “ईरान को यह समझना होगा कि वह कभी भी परमाणु हथियार या परमाणु बम नहीं बना सकता और न ही हासिल कर सकता है।”
अपने संदेश के अंत में ट्रंप ने मध्य पूर्व के देशों को सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने उन देशों से भी अब्राहम समझौते में शामिल होने की अपील की, जो अभी तक इससे नहीं जुड़े हैं। ट्रंप ने यहां तक कहा कि संभव है भविष्य में ईरान भी इस समझौते का हिस्सा बनना चाहे।
गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त हवाई हमले किए थे। इन हमलों में ईरान के कई वरिष्ठ अधिकारी और शीर्ष नेता मारे गए थे। इसके जवाब में ईरान ने फारस की खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी और इजरायली सहयोगियों पर हमले किए और होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया था।
बाद में पाकिस्तान की मध्यस्थता से 8 अप्रैल को युद्धविराम लागू हुआ। इसके बाद ट्रंप ने संघर्ष विराम को अनिश्चितकाल तक बढ़ाने की घोषणा की थी।
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ट्रंप का यह नया बयान संकेत देता है कि फिलहाल अमेरिका सैन्य टकराव के बजाय बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है।