वॉशिंगटन
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को घोषणा की कि उन्होंने ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों को लेकर ईरानी अधिकारियों के साथ होने वाली सभी बैठकें रद्द कर दी हैं। इसके साथ ही उन्होंने ईरान के नागरिकों से कहा कि “मदद भेजी जा रही है,” हालांकि उन्होंने स्पष्ट नहीं किया कि यह मदद किस प्रकार की होगी।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मानवाधिकार निगरानी संस्थाओं के अनुसार, ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों में अब तक 2,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। अमेरिका ने पहले भी चेतावनी दी थी कि यदि ईरानी सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ घातक बल का प्रयोग करती है, तो वाशिंगटन सैन्य कार्रवाई करने का विकल्प खुला रखता है।
हालांकि, राष्ट्रपति ने स्पष्ट नहीं किया कि अमेरिकी प्रशासन ने किसी प्रकार की सैन्य प्रतिक्रिया का निर्णय लिया है या नहीं। उन्होंने अपने हालिया सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से ईरानी नागरिकों को प्रोत्साहित किया और प्रदर्शन जारी रखने की सलाह दी।
ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा, “ईरानी देशभक्तों, प्रदर्शन जारी रखो — अपनी संस्थाओं पर कब्जा करो! हत्यारों और अत्याचारियों के नाम दर्ज कर लो। उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। जब तक प्रदर्शनकारियों की निरर्थक हत्याएं बंद नहीं होतीं, मैंने ईरानी अधिकारियों के साथ सभी बैठकें रद्द कर दी हैं। मदद भेजी जा रही है।”
इस बीच, ट्रंप का रुख पिछले कुछ दिनों के दौरान अचानक बदलता नजर आया। पहले उन्होंने अमेरिका की ओर से ईरानी सरकार को कड़े संदेश और सैन्य हमलों की चेतावनी दी थी, लेकिन अब वे बातचीत के बजाय प्रत्यक्ष रूप से प्रदर्शनकारियों को समर्थन देने का संकेत दे रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप का यह कदम ईरानी सरकार पर दबाव बढ़ाने और प्रदर्शनकारियों का मनोबल ऊंचा करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। इसके बावजूद, यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका से भेजी जाने वाली मदद किस रूप में होगी – क्या यह मानवीय सहायता होगी या राजनीतिक समर्थन।
ईरान में विरोध प्रदर्शन 28 दिसंबर से लगातार जारी हैं और इनकी हिंसक कार्रवाई ने देश में व्यापक अस्थिरता पैदा कर दी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस अस्थिरता के बीच यह संदेश देकर अपनी सरकार की ठोस नीति को भी प्रदर्शित किया कि अमेरिका प्रदर्शनकारियों के समर्थन में कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।इस प्रकार, ट्रंप की घोषणा और बैठक रद्द करने का निर्णय दोनों ही ईरान में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान संबंधों की संवेदनशील स्थिति को दर्शाता है।






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