दोहा
कतर और ईरानी अधिकारियों ने ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों और अमेरिका की बढ़ती हस्तक्षेप की धमकियों के बीच फोन पर बातचीत की। इस दौरान दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने और हिंसा कम करने के उपायों पर चर्चा की।
ईरान के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी ने मंगलवार को कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी से फोन पर बात की। इस बातचीत के दौरान कतर ने अपने प्रयासों और भूमिका को दोहराया, जिसमें क्षेत्र में तनाव कम करने और शांतिपूर्ण समाधान के लिए समर्थन देने की प्रतिबद्धता शामिल है।
कतर के प्रधानमंत्री अल थानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक बयान में कहा कि उन्होंने “कतर राज्य के सभी प्रयासों का समर्थन दोहराया, जो क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता बढ़ाने के लिए तनाव कम करने और शांतिपूर्ण उपायों को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि कतर इस समय सभी पक्षों के बीच संवाद और कूटनीतिक समाधान को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बातचीत का मकसद ईरान में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा को रोकना और अमेरिका के संभावित हस्तक्षेप के जोखिम को कम करना था। कतर ने पहले भी इस तरह के मामलों में मध्यस्थ की भूमिका निभाई है और दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित करने का प्रयास किया है।
कतर पिछले साल जून में हुए 12-दिन के इजरायल युद्ध के दौरान भी अप्रत्यक्ष रूप से विवाद के बीच फंस गया था। उस समय ईरान ने अमेरिकी हवाई हमलों के जवाब में अल-उदैद एयर बेस (जो दोहा के बाहर स्थित है) को निशाना बनाया था। यह हमला अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को और बढ़ा गया था, और कतर ने तुरंत मध्यस्थता करते हुए स्थिति को शांत किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान बातचीत भी उसी तरह कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देने का प्रयास है, ताकि ईरान में विरोध प्रदर्शन और अमेरिकी धमकियों के बीच स्थिति और बिगड़ने से रोकी जा सके।
कुल मिलाकर, कतर और ईरानी अधिकारियों की यह वार्ता मध्य पूर्व में स्थिरता बनाए रखने, हिंसा को कम करने और कूटनीतिक संवाद को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि क्षेत्रीय संकट में कतर सक्रिय मध्यस्थ के रूप में कार्य कर रहा है और दोनों पक्षों के बीच बातचीत के लिए मंच प्रदान कर रहा है।






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