वॉशिंगटन
अमेरिकी सेनेटर लिंडसे ग्राहम ने बुधवार को कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने द्विपक्षीय रूस प्रतिबंध बिल (Bipartisan Russia Sanctions Bill) को मंजूरी दे दी है। ग्राहम के अनुसार, यह बिल भारत, चीन और ब्राजील के खिलाफ दबाव बनाने में मदद करेगा, ताकि ये देश रूस से सस्ता तेल खरीदना बंद करें और "पुतिन की युद्ध मशीन" को वित्तीय सहायता देने वाले देशों को दंडित किया जा सके।
ग्राहम ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि यह कदम यूक्रेन के लिए जारी शांति वार्ताओं के बीच आया है और अगले सप्ताह इसके लिए द्विपक्षीय मतदान होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, “यह बिल राष्ट्रपति ट्रंप को उन देशों को दंडित करने की अनुमति देगा जो सस्ता रूस तेल खरीदकर पुतिन की रक्तपात वाली मशीन का समर्थन कर रहे हैं। इसके जरिए ट्रंप के पास भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों पर जबरदस्त दबाव होगा ताकि वे रूस से सस्ता तेल खरीदना बंद करें। मैं अगले सप्ताह इस पर मजबूत द्विपक्षीय वोट की उम्मीद करता हूँ।”
यूएस कांग्रेस की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, “Sanctioning of Russia Act 2025” नामक इस बिल में कई प्रावधान शामिल हैं। इनमें रूस से आयातित सभी वस्तुओं और सेवाओं पर कम से कम 500% कस्टम शुल्क लगाने का प्रस्ताव है, ताकि रूस की अर्थव्यवस्था पर आर्थिक दबाव बढ़ाया जा सके।
रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर अमेरिका और यूक्रेन के बीच कूटनीतिक बातचीत भी चल रही है। 7 जनवरी को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की, जिसमें रूस-यूक्रेन संघर्ष के समाधान पर चर्चा हुई।
इससे पहले, ट्रंप ने दावा किया था कि प्रधानमंत्री मोदी रूस से तेल खरीद पर लगाए गए उच्च टैरिफ से नाखुश हैं। उन्होंने कहा, “मेरे और मोदी के बीच अच्छे संबंध हैं, लेकिन भारत ने जब रूस से तेल खरीदा तो यह टैरिफ मुद्दा पैदा हुआ। उन्होंने इसे घटा दिया, ताकि मुझे संतुष्ट किया जा सके।” हालांकि, भारत ने इस दावे को खारिज किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप को रूस से तेल खरीदना बंद करने का आश्वासन दिया।
रूस प्रतिबंध बिल और टैरिफ विवाद ने अमेरिका-भारत संबंधों में नई चर्चा पैदा कर दी है, जबकि इसके प्रभाव को अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी देखा जा रहा है।