इस्लामाबाद/कराची
पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची में सैकड़ों ट्रांसजेंडर लोगों और उनके समर्थकों ने बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक कठिनाइयों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लगातार बढ़ती कीमतों ने पहले से ही सामाजिक और आर्थिक रूप से हाशिये पर रह रहे ट्रांसजेंडर समुदाय का जीवन और अधिक कठिन बना दिया है। यह जानकारी फ्रांसीसी समाचार एजेंसी एएफपी की एक रिपोर्ट में दी गई है।
प्रदर्शन के दौरान ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों ने हाथों में तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारे लगाए और बढ़ती महंगाई से राहत देने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि ईंधन, खाद्य पदार्थों, किराए और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगातार वृद्धि के कारण उनके लिए दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल हो गया है।
एक तख्ती पर लिखा था, "ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं, हमारी थालियां खाली हैं।" वहीं एक अन्य पोस्टर पर लिखा था, "हम सड़कों पर भीख मांगते हैं, आप आईएमएफ से भीख मांगिए।" यह टिप्पणी पाकिस्तान द्वारा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से लिए गए वित्तीय सहायता पैकेज की ओर संकेत करती है।
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में पिछले कुछ वर्षों में ट्रांसजेंडर समुदाय को कई कानूनी अधिकार और संरक्षण मिले हैं, लेकिन सामाजिक स्तर पर उन्हें अब भी भेदभाव, उपेक्षा और बहिष्कार का सामना करना पड़ता है। परिवारों द्वारा अस्वीकार किए जाने और रोजगार के सीमित अवसरों के कारण समुदाय के कई लोगों को भीख मांगने या असंगठित कार्यों पर निर्भर रहना पड़ता है।
प्रदर्शन का आयोजन करने वाले संगठन जेंडर इंटरएक्टिव एलायंस की प्रमुख आराध्या खान ने कहा कि ख्वाजा सिरा (ट्रांसजेंडर) समुदाय को सम्मान, सुरक्षा और समान अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि आर्थिक संकट का सबसे अधिक असर उन लोगों पर पड़ रहा है जो पहले से ही समाज के कमजोर वर्गों में शामिल हैं।
ट्रांसजेंडर मानवाधिकार कार्यकर्ता शहजादी राय ने कहा कि समुदाय के अधिकांश लोग सम्मानजनक रोजगार पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में बढ़ती महंगाई ने उनकी परेशानियों को कई गुना बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा, "जब पूरे पाकिस्तान में आम लोगों के लिए जीवन कठिन हो गया है, तब ट्रांसजेंडर समुदाय की स्थिति और भी अधिक दयनीय हो गई है।"
एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, हाल के महीनों में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर वैश्विक परिस्थितियों और ऊर्जा कीमतों में वृद्धि का असर पड़ा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में मुद्रास्फीति दर तीन महीनों में 5.5 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 10 प्रतिशत तक पहुंच गई है। वहीं पाकिस्तान की सरकारी सांख्यिकी एजेंसी के अनुसार, जून महीने में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 11.1 प्रतिशत अधिक दर्ज किया गया।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि महंगाई पर नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं और समाज के सबसे कमजोर वर्गों के लिए विशेष राहत योजनाएं शुरू की जाएं। उनका कहना है कि बढ़ती कीमतों के कारण सीमित आय में गुजारा करना लगभग असंभव होता जा रहा है।
पाकिस्तान में ट्रांसजेंडर समुदाय, जिसे स्थानीय स्तर पर "ख्वाजा सिरा" कहा जाता है, का एक लंबा सांस्कृतिक और सामाजिक इतिहास रहा है। पारंपरिक रूप से यह समुदाय शादियों और नवजात शिशुओं के जन्म जैसे अवसरों पर आशीर्वाद देने की भूमिका निभाता रहा है। हालांकि आधुनिक समय में सामाजिक भेदभाव और सीमित रोजगार अवसरों ने इस समुदाय के सामने कई नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
कराची में हुआ यह प्रदर्शन केवल महंगाई के खिलाफ विरोध नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन, रोजगार के अवसर और सामाजिक समानता की मांग का भी प्रतीक माना जा रहा है।