नाहन में मुस्लिमों ने किया भगवान जगन्नाथ रथ का स्वागत

Story by  मलिक असगर हाशमी | Published by  [email protected] | Date 29-07-2026
Muslims welcomed the Lord Jagannath chariot in Nahan.
Muslims welcomed the Lord Jagannath chariot in Nahan.

 

आवाज द वाॅयस/ नई दिल्ली

हिमाचल प्रदेश के शांत और खूबसूरत पहाड़ी शहर नाहन से एक बहुत ही दिल छू लेने वाली खबर सामने आई है। इस खबर ने पूरे देश में आपसी भाईचारे और सौहार्द की नई अलख जगा दी है। पिछले कुछ समय से हिमाचल प्रदेश के कुछ इलाकों में धार्मिक स्थलों को लेकर थोड़ी अनबन और अविश्वास का माहौल देखा गया था। लेकिन नाहन की ऐतिहासिक धरती ने यह साबित कर दिया कि भारत की साझी संस्कृति और बंधुत्व की बुनियाद बहुत मजबूत है। नाहन में जब भगवान श्री जगन्नाथ जी की भव्य रथ यात्रा निकाली गई, तो वहां एक अद्भुत और अविस्मरणीय नजारा देखने को मिला। इस धार्मिक आयोजन में केवल हिंदू श्रद्धालु ही शामिल नहीं थे, बल्कि स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी बड़ी संख्या में आगे बढ़कर भगवान जगन्नाथ का स्वागत किया। मुस्लिम समाज के लोगों ने रथ पर फूलों की वर्षा की, आरती उतारी और पूरी श्रद्धा के साथ जय जगन्नाथ के नारे लगाए।

सिरमौर जिले के मुख्यालय नाहन शहर का इतिहास सदियों पुराना और गौरवशाली रहा है। नाहन के बड़ा चौक स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर को उत्तर भारत के सबसे प्राचीन मंदिरों में गिना जाता है। यहां रियासत काल से ही भगवान जगन्नाथ की यात्रा निकालने का रिवाज रहा है। हालांकि वर्ष 2009 से श्री जगन्नाथ रथ यात्रा मंडल समिति ने इस आयोजन को भव्य रूप देना शुरू किया।

इस वर्ष आयोजित हुई विशाल रथ यात्रा में हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश से हजारों की संख्या में श्रद्धालु नाहन पहुंचे। पूरा शहर भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलराम जी की भक्ति के रंगों में रंगा हुआ नजर आ रहा था।

जब नाहन के ऐतिहासिक चौगान मैदान से भव्य रथ रवाना हुआ और शहर के विभिन्न रास्तों से गुजरने लगा, तब हर धर्म के लोगों ने अपनी-अपनी तरह से इस यात्रा का अभिनंदन किया। रथ यात्रा जब पक्का टैंक और कच्चा टैंक स्थित जामा मस्जिद के नजदीक पहुंची, तो वहां का दृश्य बेहद भावुक करने वाला था।

स्थानीय मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों ने ढोल की थाप पर रथ का स्वागत किया। मुस्लिम नवयुवक समिति के सदस्यों और वरिष्ठ नागरिकों ने रथ यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के लिए ठंडे पानी, शरबत और मिठाइयों के विशेष प्रबंध किए हुए थे। इतना ही नहीं, मुस्लिम समाज के कई युवाओं ने खुद आगे बढ़कर भगवान के रथ की रस्सियों को खींचा और आशीर्वाद प्राप्त किया।

नाहन से सामने आए इस भाईचारे के वीडियो सोशल मीडिया पर बहुत तेजी से फैल रहे हैं। इंटरनेट पर लाखों लोग इन दृश्यों को देखकर भारतीय संस्कृति की मुक्तकंठ से सराहना कर रहे हैं। सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं का कहना है कि नाहन के लोगों ने देश के सामने एक मिसाल रखी है।

जब समाज में कुछ लोग विभाजन पैदा करने की कोशिश करते हैं, तब नाहन जैसी तस्वीरें यह संदेश देती हैं कि भारत का दिल हमेशा से एक रहा है। लोगों ने लिखा कि एक तरफ मस्जिद के पास खड़े मुस्लिम युवक हाथों में फूल लेकर स्वागत कर रहे थे और दूसरी तरफ जय जगन्नाथ के जयकारे गूंज रहे थे। यह नजारा भारत के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को और अधिक ताकत प्रदान करता है।

इस्लाम और कुरान की मूल शिक्षाएं सभी धर्मों के प्रति आदर और सामाजिक न्याय का पाठ पढ़ाती हैं। मुस्लिम विद्वानों का कहना है कि कुरान में मुसलमानों को गैर-मुस्लिमों के साथ दया, करुणा और न्यायपूर्ण व्यवहार करने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है।

 

पवित्र कुरान के सूरह अल-मुम्तहना की आयत में लिखा है कि ईश्वर तुम्हें उन लोगों के साथ भलाई और न्याय करने से मना नहीं करता जिन्होंने धर्म के नाम पर तुमसे लड़ाई नहीं की है। नाहन के मुस्लिम समुदाय ने इसी मानवीय और धार्मिक शिक्षा का पालन करते हुए अपनी आस्था पर अटल रहते हुए पड़ोसी धर्म के प्रति अटूट सम्मान प्रदर्शित किया है।

नाहन में आयोजित इस ऐतिहासिक रथ यात्रा में कई प्रमुख राजनीतिक और प्रशासनिक हस्तियां मौजूद थीं। स्थानीय विधायक अजय सोलंकी, पूर्व विधायक डॉ. राजीव बिंदल और सिरमौर की जिलाधिकारी प्रियंका वर्मा ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान की आरती उतारी और रथ खींचा। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता शांता कुमार ने इस घटना की सराहना करते हुए एक विशेष बयान जारी किया।

उन्होंने कहा कि नाहन के मुस्लिम समाज ने जिस तरह रथ यात्रा का स्वागत कर भक्तों को गले लगाया, वह राष्ट्रीय एकता का एक बहुत बड़ा उदाहरण है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के शिकागो भाषण का जिक्र करते हुए कहा कि जैसे सभी नदियां अलग रास्तों से बहकर एक ही महासागर में मिलती हैं, वैसे ही सभी धर्म एक ही परमेश्वर की ओर ले जाते हैं।

नाहन शहर में विभिन्न समुदायों के बीच प्रेम और भाईचारा कोई नई बात नहीं है। यहां रियासत काल से ही हिंदू, मुस्लिम और सिख समुदाय के लोग एक-दूसरे के पर्वों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते रहे हैं। ईद हो या दिवाली, गुरुपर्व हो या रथ यात्रा, नाहन का हर नागरिक इन खुशियों को साझा करता है।

रथ यात्रा के अवसर पर शहर के व्यापारियों और आम नागरिकों ने जगह-जगह लंगर और भंडारों का आयोजन किया था। हलवा, कढ़ी-चावल, खीर और जलजीरा जैसी चीजें श्रद्धालुओं के लिए निशुल्क बांटी गईं। पूरा नाहन शहर मेहमाननवाजी और भक्ति भाव में डूबा हुआ नजर आया।

नाहन में संपन्न हुई यह रथ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन भर नहीं थी, बल्कि यह भारतीय संस्कृति की मूल आत्मा का जीवंत प्रदर्शन थी। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद आम लोगों ने जिस तरह अपनी समझदारी और प्यार से शांति का संदेश दिया है, उसकी हर तरफ चर्चा हो रही है। नाहन की यह घटना साबित करती है कि भारत की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है और जब लोग एकजुट होकर खड़े होते हैं, तो नफरत की हर दीवार अपने आप ढह जाती है।