न्यूयॉर्क।
संयुक्त राज्य अमेरिका ने उत्तरी अटलांटिक महासागर में रूसी ध्वज वाले एक तेल टैंकर को जब्त कर लिया है। यह कार्रवाई बुधवार, 7 जनवरी को की गई। अमेरिकी प्रशासन पिछले कई दिनों से इस टैंकर को अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश कर रहा था, जिसमें अंततः उसे सफलता मिल गई। इस घटना के बाद अमेरिका और रूस के बीच कूटनीतिक तनाव और गहरा हो गया है।
रूस ने टैंकर की जब्ती की कड़ी निंदा की है और इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का उल्लंघन बताया है। रूसी परिवहन मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन के तहत खुले समुद्र में नौवहन की पूर्ण स्वतंत्रता सुनिश्चित की गई है। मंत्रालय के अनुसार, किसी भी देश को खुले समुद्र में किसी अन्य देश में पंजीकृत या अपंजीकृत जहाज के खिलाफ बल प्रयोग करने का अधिकार नहीं है। रूस का कहना है कि अमेरिका की यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है।
वहीं, अमेरिका ने अपनी कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा है कि ‘बेला-1’ नामक इस टैंकर को प्रतिबंधों के उल्लंघन के आरोप में जब्त किया गया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री ने बयान जारी कर कहा कि वेनेजुएला के अवैध तेल पर लगाए गए प्रतिबंध वैश्विक स्तर पर सख्ती से लागू किए जा रहे हैं और इस मामले में कोई ढील नहीं दी जाएगी।
रूसी मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका ने टैंकर पर कब्जा करने के लिए हेलीकॉप्टरों के जरिए सैनिक उतारने की भी कोशिश की थी। कुछ घंटों के भीतर ही टैंकर को अपने नियंत्रण में लेने की पुष्टि हो गई। इससे पहले अमेरिकी तटरक्षक बल ने जहाज को रोकने और उसका निरीक्षण करने की कोशिश की थी, लेकिन टैंकर के चालक दल ने उनके निर्देशों का पालन नहीं किया।
इस घटना को लेकर मॉस्को और वाशिंगटन के बीच तनाव और बढ़ गया है। अमेरिकी प्रेस सचिव कैरोलिन लेवेट से जब इस मुद्दे पर सवाल किया गया कि क्या रूसी ध्वज वाले टैंकर की जब्ती से रूस नाराज़ होगा, तो उन्होंने इस पर सीधा जवाब देने से बचते हुए कहा कि कार्रवाई प्रतिबंधों के उल्लंघन के आधार पर की गई है।
अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि यह टैंकर वेनेजुएला से तेल लेकर ईरान और रूस की ओर जा रहा था, जो अमेरिकी प्रतिबंधों का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने यह भी कहा कि टैंकर के चालक दल को अमेरिका लाया जाएगा और वेनेजुएला के जलक्षेत्र को प्रतिबंधों के तहत छोड़ने के आरोप में उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
स्रोत: अल जज़ीरा






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