लंदन
ब्रिटिश सेना के पूर्व जवान और महारानी एलिज़ाबेथ के पोते प्रिंस हैरी ने शुक्रवार को कहा कि अफगानिस्तान युद्ध के दौरान ब्रिटिश सैनिकों द्वारा दिए गए बलिदानों को हमेशा सच्चाई और सम्मान के साथ याद किया जाना चाहिए। उनका यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस विवादित बयान के बाद आया है, जिसमें ट्रंप ने दावा किया था कि अफगानिस्तान युद्ध के दौरान नाटो देशों के सैनिक, अमेरिका को छोड़कर, मोर्चे से दूर रहे।
प्रिंस हैरी, जिन्होंने ब्रिटिश सेना में दो बार अफगानिस्तान में सेवा दी है, ने कहा कि 11 सितंबर, 2001 के आतंकवादी हमलों के बाद अमेरिका के सहयोगियों ने उसके साथ खड़े होने के लिए समर्थन दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अफगानिस्तान में युद्ध सिर्फ अमेरिका का संघर्ष नहीं था, बल्कि यह एक अंतरराष्ट्रीय प्रयास था, जिसमें ब्रिटिश सैनिकों ने अपनी जान जोखिम में डालकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रिंस हैरी ने भावुक स्वर में कहा, “मैंने वहां सेवा की, वहां अपने अच्छे दोस्त बनाए, और अफगानिस्तान में अपने कुछ सबसे प्रिय दोस्तों को खोया। अकेले ब्रिटेन के 457 सैनिकों ने अपनी जान गंवाई।” उनका यह बयान न केवल सैनिकों के साहस और बलिदान की याद दिलाता है, बल्कि युद्ध में उनके अनुभवों और व्यक्तिगत पीड़ा को भी सामने लाता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि अफगानिस्तान में युद्ध की कहानी सिर्फ आंकड़ों या राजनीतिक दावों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। सैनिकों के संघर्ष, उनके मनोबल और उनके परिवारों द्वारा सही गई कठिनाइयों को भी सार्वजनिक चर्चा में सम्मानजनक रूप से शामिल किया जाना चाहिए। प्रिंस हैरी ने यह भी कहा कि युद्ध के अनुभव ने उन्हें जीवन, दोस्ती और साहस की गहरी समझ दी।
उनका यह बयान ब्रिटिश सेना और उनके परिवारों को भी सम्मान देने का संदेश है। अफगानिस्तान में सैनिकों के बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता, और इसे केवल राजनीतिक बयानबाज़ियों या मीडिया रिपोर्टों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। प्रिंस हैरी की आवाज़ यह याद दिलाती है कि सैनिक केवल संख्या नहीं, बल्कि देश के लिए खुद को समर्पित इंसान हैं।
प्रिंस हैरी के इस स्पष्ट और भावनात्मक बयान ने ब्रिटिश और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियां बटोरी हैं। उनका कहना है कि युद्ध की सच्चाई को छुपाया नहीं जा सकता, और प्रत्येक सैनिक की कहानी, उनका साहस और बलिदान हमेशा सम्मान के साथ याद किया जाना चाहिए।