गुलाम कादिर
रमजान का पवित्र महीना कुछ ही दिनों में दस्तक देने वाला है और दुनियाभर के मुसलमान इस पाक महीने के स्वागत और रोज़ा रखने की तैयारियों में जुट गए हैं। इसी बीच, मक्का और मदीना की दो पवित्र मस्जिदों - मस्जिद अल हरम और मस्जिद नबवी में उमराह और रमजान के दौरान आने वाले तीर्थयात्रियों की सुविधा और इबादत के लिए व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने हेतु वरिष्ठ इमामों की उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता शेख प्रोफेसर डॉ. अब्दुल रहमान अल-सुदैस ने की, जो दो पवित्र मस्जिदों के धार्मिक मामलों के अध्यक्ष भी हैं।

बैठक का मुख्य उद्देश्य रमजान 1447 एएच के दौरान मस्जिदों में होने वाली सभी इबादत और सेवाओं को अंतिम रूप देना, तीर्थयात्रियों का अनुभव बेहतर बनाना और विश्वभर के मुसलमानों तक धार्मिक संदेश और मार्गदर्शन पहुँचाने की रणनीति तैयार करना था।
बैठक में नमाज, खुतबा, तारावीह, रोज़ा, सेहरी और इफ्तार के कार्यक्रमों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके अलावा एतेकाफ, कुरानिक पाठ, ओराटरी वर्कशॉप और इमामों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अंतिम रूप दिया गया।
शेख अल-सुदैस ने बैठक में बताया कि यह प्रयास विशेष रूप से तीर्थयात्रियों के अनुभव को समृद्ध बनाने, उनकी आध्यात्मिक वृद्धि सुनिश्चित करने और धार्मिक ज्ञान को सुदृढ़ करने के लिए किया गया है।
बैठक में धार्मिक सवालों के उत्तर देने के लिए कार्यक्रमों को और अधिक सुदृढ़ किया गया और विश्वसनीय बहुभाषी सामग्री की उपलब्धता पर जोर दिया गया।
संचालन और तकनीकी तैयारी के हर पहलू पर ध्यान दिया गया ताकि रमजान के महीने में सभी सेवाएं पूरी तत्परता और उत्कृष्टता के साथ उपलब्ध हो सकें।
मक्का क्षेत्र के उपराज्यपाल, उनके शाही उच्चता प्रिंस सऊद बिन मिशाल बिन अब्दुलअज़ीज़ को भी शेख अल-सुदैस और ग्रैंड मस्जिद के इमामों की टीम ने योजनाओं और तैयारियों की जानकारी दी।
रमजान 1447 एएच में ग्रैंड मस्जिद मक्का में तारावीह की नमाज पढ़ाने वाले इमामों की सूची को 13 जनवरी 2026 को आधिकारिक रूप से जारी कर दिया गया।
इस वर्ष, तारावीह पढ़ाने वाले सात प्रमुख इमाम निम्नलिखित हैं: शेख अब्दुल रहमान अल-सुदैस, शेख माहेर अल-मुहाइक़ली, शेख अब्दुल्ला जुहानी, शेख बंदर बलीला, शेख यासिर दावसरी, शेख बद्र अल-तुर्की और शेख वलीद अल-शम्सान।
ये सभी इमाम कुरानिक पाठ, उपदेश और धार्मिक ज्ञान के क्षेत्र में कुशल और अनुभवी हैं। शेख अल-सुदैस अपने भावपूर्ण और प्रभावशाली कुरानिक पाठ के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध हैं, जबकि शेख माहेर अल-मुहाइक़ली संतुलित और स्पष्ट पाठ शैली के लिए जाने जाते हैं।
शेख अब्दुल्ला जुहानी मधुर आवाज़ और उम अल-क़ुरा विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के रूप में अपने योगदान के लिए प्रसिद्ध हैं।
शेख बंदर बलीला, शेख यासिर दावसरी और शेख बद्र अल-तुर्की धार्मिक शिक्षा और उपदेश में गहन अनुभव रखते हैं।
शेख वलीद अल-शम्सान ग्रैंड मस्जिद में सम्मानित इमाम के रूप में जाने जाते हैं और उनका कुरानिक पाठ अत्यंत भावपूर्ण होता है।
रमजान का आरंभ चांद देखने के अनुसार तय किया जाएगा। उम अल-क़ुरा कैलेंडर के अनुसार, नया चाँद 17 फरवरी 2026 को दिखाई देने की संभावना है।
यदि चाँद 17 फरवरी को दिखाई देता है, तो रमजान 18 फरवरी, बुधवार से शुरू होगा। यदि नया चाँद नहीं दिखाई देता है, तो 18 फरवरी को शाबान 1447 एएच माना जाएगा और रमजान 19 फरवरी, गुरुवार से आरंभ होगा।
रमजान के पवित्र महीने में तारावीह की नमाज ईशा के बाद अदा की जाती है। यह अनिवार्य नहीं है, लेकिन विशेष रात की नमाज के रूप में इसका महत्व तहजु्द के समान है।
पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इसे जुमे की नमाज़ से पहले अदा किया था। दुनियाभर की मस्जिदों की तरह, मक्का और मदीना की पवित्र मस्जिदों में भी तारावीह की नमाज अदा की जाती है और इसे लाइव प्रसारित किया जाता है।

मक्का और मदीना में रमजान के पूरे महीने में लाखों मुसलमान उमराह करने आते हैं, इसलिए तारावीह की नमाज पढ़ाने वाले इमामों के चयन पर विशेष ध्यान दिया जाता है। चयनित इमामों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसमें कुरानिक पाठ, उपदेश और ओराटरी वर्कशॉप शामिल हैं। यह सुनिश्चित करता है कि इमाम अपने पाठ और उपदेश के माध्यम से तीर्थयात्रियों और विश्वभर के मुसलमानों को आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान कर सकें।
इस वर्ष की तैयारियों में केवल धार्मिक पहलुओं पर ही ध्यान नहीं दिया गया, बल्कि तीर्थयात्रियों की सुविधा, सेवाओं की गुणवत्ता और बहुभाषी सामग्री की उपलब्धता पर भी विशेष जोर दिया गया है। शेख अल-सुदैस ने कहा कि रमजान की यह तैयारी तीर्थयात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने, उनकी आध्यात्मिक वृद्धि और धार्मिक शिक्षा को सुदृढ़ करने के लिए की जा रही है।
मक्का और मदीना में रमजान के दौरान सभी सेवाओं की निगरानी के लिए तकनीकी और संचालन से जुड़े सभी पहलुओं को ध्यान में रखा गया है। इस पवित्र माह में तारावीह और नमाज़ अदा करने वाले इमामों की सेवाओं को विश्व स्तर पर प्रसारित किया जाएगा, ताकि दुनियाभर के मुसलमान भी इससे लाभान्वित हो सकें।

इस प्रकार, मक्का-मदीना की पवित्र मस्जिदों में रमजान 1447 एएच के लिए तैयारियाँ पूरी हो चुकी हैं। इमामों की नियुक्ति, प्रशिक्षण और सेवाओं की विस्तृत योजना ने यह सुनिश्चित किया है कि तीर्थयात्रियों और दुनियाभर के मुसलमानों के लिए यह रमजान महीना आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध और यादगार रहेगा। पवित्र महीने की शुरूआत के साथ ही मक्का-मदीना की मस्जिदें पूरी तैयारी के साथ मुसलमानों का स्वागत करेंगी और उन्हें एक अद्वितीय आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करेंगी।