ईरान समझौते की कोशिशों के बीच ट्रंप और नेतन्याहू के रिश्तों में तनाव उभरा

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 17-06-2026
Tensions emerge between Trump and Netanyahu amid efforts to reach an Iran deal
Tensions emerge between Trump and Netanyahu amid efforts to reach an Iran deal

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच लंबे समय से चले आ रहे करीबी संबंध अब परीक्षा के दौर से गुजरते दिख रहे हैं। ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने के लिए समझौते को अंतिम रूप देने की ट्रंप की कोशिशों के बीच उन्होंने नेतन्याहू की सार्वजनिक रूप से आलोचना की है।
 
पिछले वर्ष नेतन्याहू ने ट्रंप को ‘‘व्हाइट हाउस में इजराइल का सबसे बड़ा मित्र’’ बताया था। हालांकि अब ट्रंप ने नेतन्याहू के फैसलों पर सवाल उठाते हुए तीखी टिप्पणियां की हैं। उन्होंने यहां तक कहा कि ‘‘मेरे बिना इजराइल नहीं होता।’’
 
नेतन्याहू चार अमेरिकी राष्ट्रपतियों के कार्यकाल के दौरान प्रधानमंत्री रहे हैं और विभिन्न अवसरों पर सभी प्रशासन के साथ उनके मतभेद रहे हैं। हालांकि किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने सार्वजनिक रूप से उनकी आलोचना उतनी खुलकर नहीं की, जितनी ट्रंप ने की है।
 
यह तनाव ऐसे समय सामने आया है जब ट्रंप लेबनान में इजराइली हमलों को लेकर नाराजगी जता रहे हैं। उनका मानना है कि इन हमलों से वाशिंगटन और तेहरान के बीच चल रही वार्ताओं पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। अमेरिका ईरान के साथ समझौते को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, जबकि देश के भीतर युद्ध को लेकर राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है और ईंधन की कीमतों में वृद्धि भी चिंता का विषय बनी हुई है।
 
पश्चिम एशिया मामलों के विशेषज्ञ एवं विभिन्न अमेरिकी प्रशासन के सलाहकार रह चुके आरोन डेविड मिलर ने कहा कि यदि नेतन्याहू ट्रंप की किसी महत्वपूर्ण प्राथमिकता के आड़े आते हैं, विशेष रूप से युद्ध समाप्त करने के प्रयासों में, तो ट्रंप अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने के लिए तैयार हैं।
 
ईरान के साथ प्रस्तावित समझौते पर शुक्रवार को जिनेवा में हस्ताक्षर होने की संभावना है। फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने कहा कि उन्होंने नेतन्याहू से उनकी हालिया गतिविधियों पर असंतोष व्यक्त किया है।
 
उन्होंने कहा, ‘‘अमेरिका के बिना इजराइल नहीं होता। मेरे बिना भी इजराइल नहीं होता, क्योंकि किसी अन्य राष्ट्रपति ने वह नहीं किया जो मैंने किया।’’ ट्रंप ने साथ ही कहा कि उनके और नेतन्याहू के बीच अच्छे संबंध रहे हैं, लेकिन अब नेतन्याहू को लेबनान के मुद्दे पर अधिक जिम्मेदारी दिखानी होगी।
 
वाशिंगटन में लंबे समय तक इजराइल के समर्थन को लेकर दोनों प्रमुख दलों के बीच सहमति रही है, लेकिन हाल के वर्षों में इसमें दरारें दिखाई दी हैं। गाजा युद्ध के दौरान फलस्तीनियों के साथ इजराइल के व्यवहार को लेकर उदारवादी वर्ग में नाराजगी बढ़ी है, जबकि कुछ रूढ़िवादी समूह भी अमेरिका द्वारा इजराइल को दिए जाने वाले पारंपरिक समर्थन पर सवाल उठा रहे हैं।