शफी बरफत ने सिंधुदेश जनमत संग्रह की मांग की

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 10-08-2026
Shafi Burfat appeals to UN, global community for Sindh's territorial integrity, calls for Sindhudesh referendum
Shafi Burfat appeals to UN, global community for Sindh's territorial integrity, calls for Sindhudesh referendum

 

फ्रैंकफर्ट
 
जेय सिंध मुत्तहिदा महाज (JSMM) के अध्यक्ष शफी बरफत ने सिंधुदेश नेशनल मूवमेंट और वैश्विक सिंधी प्रवासी समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सिंध की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा की अपील की है। उन्होंने सिंध के राजनीतिक भविष्य को तय करने के लिए संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में स्वतंत्र और निष्पक्ष जनमत संग्रह कराने की मांग की है।
 
संयुक्त राष्ट्र महासचिव, सुरक्षा परिषद, मानवाधिकार उच्चायुक्त, IMF, विश्व बैंक और विभिन्न देशों की सरकारों को संबोधित अपील में सिंधी प्रतिनिधियों ने सिंध में कथित राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय संकटों का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीकृत नीतियों, जनसांख्यिकीय बदलाव और संसाधनों के कथित दोहन से सिंध की पहचान और अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
 
अपील में सिंध के जल, भूमि, प्राकृतिक संसाधनों और तटीय क्षेत्रों पर स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा की मांग की गई है। इसमें सिंधु नदी के पानी के बंटवारे, बांधों और नहर परियोजनाओं से जुड़े विवादों का भी उल्लेख किया गया। प्रतिनिधियों ने दावा किया कि पानी की कमी से समुद्री जल का बढ़ता प्रभाव, कृषि भूमि का नुकसान और मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंच रहा है।
 
शफी बरफत और उनके समर्थकों ने सिंध में कथित जबरन गुमशुदगी, मनमानी हिरासत और राजनीतिक दमन की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच की भी मांग की। साथ ही, सिंधी भाषा, संस्कृति, शिक्षा और ऐतिहासिक विरासत से जुड़े मुद्दों पर भी अंतरराष्ट्रीय जांच की अपील की गई।
 
अपील में IMF और विश्व बैंक सहित अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से पाकिस्तान को दी जाने वाली वित्तीय सहायता में मानवाधिकार, भ्रष्टाचार-रोधी और संसाधन अधिकारों से जुड़ी शर्तें शामिल करने का आग्रह किया गया।
 
सबसे प्रमुख मांग के तौर पर प्रतिनिधियों ने UN से सिंध में जनमत संग्रह आयोजित कराने और लोगों को अपने राजनीतिक भविष्य का फैसला करने का अवसर देने की अपील की। इसमें स्वतंत्र और संप्रभु सिंधुदेश के गठन को भी संभावित विकल्प के रूप में रखा गया है।